पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने शुक्रवार को एक अहम संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसे ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ नाम दिया गया है। समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसका मकसद आपसी रक्षा सहयोग बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करना है।
संयुक्त बयान के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई बैठक के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समझौते का सबसे अहम प्रावधान यह है कि तीनों देशों में से किसी एक पर होने वाला सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके अलावा तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को और मजबूत करने पर भी सहमति बनी है।
संयुक्त बयान में कहा गया कि यह समझौता तीनों देशों की सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने तथा क्षेत्र और उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मक्का समझौते से पहले पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच भी रणनीतिक रक्षा समझौता हो चुका है। सितंबर 2025 में दोनों देशों ने ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौते में भी प्रावधान था कि किसी एक देश पर हमला दोनों देशों के खिलाफ आक्रामकता माना जाएगा। इसके तहत दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग को बढ़ाने की व्यवस्था की गई थी।
अब तुर्किये के शामिल होने से पाकिस्तान और सऊदी अरब के मौजूदा रक्षा सहयोग को एक व्यापक त्रिपक्षीय ढांचा मिल गया है।
संयुक्त बयान में कहा गया कि मक्का समझौता तीनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों से प्रेरित है। इसमें भाईचारे और इस्लामी एकजुटता के साथ-साथ साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
तीनों देशों ने इस समझौते के जरिए अपनी सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटने की प्रतिबद्धता जताई है।
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव कई मोर्चों तक फैल चुका है। लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट समेत क्षेत्र के कई अहम इलाकों में सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हैं। ऐसे माहौल में खाड़ी और आसपास के देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर सक्रियता बढ़ी है।
बैठक में तीनों पक्षों ने अपने द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय संबंधों की समीक्षा की तथा साझा हितों से जुड़े क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी मौजूद रहे। पाकिस्तान के रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी सऊदी अरब की यात्रा पर पहुंचे थे।
‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच रक्षा सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा हालात लगातार बदल रहे हैं।
