उत्तराखंड में पिछले 36 घंटे से लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक नदियां, बरसाती गदेरे और नाले उफान पर हैं। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति गंगा नदी की बनी हुई है। ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण कई घाट जलमग्न हो गए हैं। वहीं, पिथौरागढ़ में काली नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में लोगों को सतर्क करना शुरू कर दिया है।
लगातार बारिश के बाद ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर काफी बढ़ गया है। त्रिवेणी घाट समेत कई घाट पानी में डूब गए हैं। परमार्थ निकेतन परिसर में स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के चरणों तक भी गंगा का पानी पहुंच गया है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने वर्ष 2013 की भीषण आपदा की यादें ताजा कर दी हैं। प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और नदी किनारे के इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
गढ़वाल के साथ-साथ कुमाऊं मंडल में भी बारिश का असर दिखाई दे रहा है। पिथौरागढ़ में काली नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। खतरे की आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीमें संवेदनशील इलाकों में मुनादी कर लोगों को सतर्क कर रही हैं।
नदी किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की जा रही है।
देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र से टोंस नदी का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ बच्चे तेज बहाव के बीच नदी में खेलते नजर आ रहे हैं। बारिश के दौरान नदी के बीच जाना बेहद जोखिम भरा है। प्रशासन और स्थानीय लोगों की ओर से भी ऐसे स्थानों से दूर रहने की अपील की जा रही है।
वहीं, देहरादून की तमसा नदी का जलस्तर भी तेज बारिश के बाद तेजी से बढ़ा है। रातभर और सुबह हुई बारिश के कारण नदी पूरे वेग से बहती दिखाई दी। आसपास के बरसाती गदेरे और नाले भी उफान पर हैं।
भारी बारिश के कारण राजधानी देहरादून के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। कुछ मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ है। आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं।
संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मौसम के लगातार बिगड़े रहने के बीच प्रशासन ने लोगों से नदियों और बरसाती नालों के आसपास जाने से बचने की अपील की है।
