onwin giriş
Home देश

राहुल गांधी ने UPI शुल्क को लेकर पीएम मोदी पर साधा निशाना, बोले- इसे वापस लीजिए

UPI पर प्रस्तावित Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर एक वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है। राहुल गांधी ने अपने वीडियो में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के फैसलों का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी से इस मामले में सख्त रुख अपनाने की अपील की।

राहुल गांधी ने वीडियो में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिम्मत दिखानी चाहिए और UPI पर लगाए जाने वाले इस शुल्क को वापस लेना चाहिए। उन्होंने इंदिरा गांधी के एक पुराने फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अपने फैसलों में दृढ़ता दिखाई। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिका के सामने झुकने का आरोप भी लगाया और UPI शुल्क के मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा।

राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को UPI पर प्रस्तावित शुल्क वापस लेना चाहिए। अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में भी उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR नियम

दरअसल, NPCI ने 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का ऐलान किया है। नए नियम के तहत 2,000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन के लिए यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आम लोगों को UPI से पैसे भेजने पर सीधे कोई टैक्स देना होगा। Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। वहीं 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान भी MDR से बाहर रहेंगे। सरकार के अनुसार, करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन भी इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।

सरकार ने कहा- MDR टैक्स नहीं है

वित्त मंत्रालय ने UPI शुल्क को लेकर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि MDR न तो टैक्स है और न ही सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क है। यह राशि बैंकों और पेमेंट ऐप समेत UPI इकोसिस्टम से जुड़े विभिन्न हिस्सेदारों के बीच वितरित की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य UPI के संचालन, तकनीकी ढांचे और भविष्य के विस्तार को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है।

सरकार ने यह भी कहा है कि बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि MDR की लागत सीधे ग्राहकों पर न डाली जाए। छोटे व्यापारियों के लिए भी कुछ लेनदेन को जीरो-MDR व्यवस्था के तहत बाहर रखा गया है। इसके अलावा रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसे कुछ क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर अलग से 5 रुपये का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।

सरकार ने रोलबैक से किया इनकार

राहुल गांधी की मांग के बीच सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि नए MDR ढांचे को वापस लेने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होगी और इसका दायरा चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन तक ही सीमित रहेगा।

Similar Posts

© 2015 News Way· All Rights Reserved.