राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द करने की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की मांग खारिज कर दी और झारखंड हाई कोर्ट के जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के जमानत आदेश को आए लगभग सात साल हो चुके हैं, इसलिए अब उसमें दखल देने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई की अपील वर्ष 2018 से लंबित है। हालांकि, कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट को मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का निर्देश दिया।
सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. वी. राजू ने दलील दी कि लालू यादव की जमानत याचिका पहले दो बार खारिज हो चुकी थी। बाद में हाई कोर्ट ने यह मानते हुए जमानत दी कि उन्होंने अपनी 50 प्रतिशत सजा पूरी कर ली है। सीबीआई का कहना था कि यह गणना सही नहीं थी, क्योंकि संबंधित सजाएं एक साथ चलने वाली नहीं थीं।
देवघर चारा घोटाला बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले से जुड़ा मामला है। वर्ष 1992 से 1995 के बीच पशुपालन विभाग में फर्जी बिलों और दस्तावेजों के जरिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की गई थी। यह घोटाला 1996 में पशुपालन विभाग में छापेमारी के बाद सामने आया, जिसके बाद सीबीआई ने जांच शुरू की।
सीबीआई ने 1997 में लालू प्रसाद यादव को इस मामले में आरोपी बनाया। करीब 950 करोड़ रुपये के इस बहुचर्चित घोटाले से जुड़े पांच मामलों में उन्हें दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई। वर्तमान में लालू यादव स्वास्थ्य संबंधी कारणों से जमानत पर हैं।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल लालू यादव की जमानत बरकरार रहेगी, जबकि मामले की आगे की सुनवाई झारखंड हाई कोर्ट में जारी रहेगी।
