नई दिल्ली/पोर्ट लुई। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडराते खतरे के बीच भारत ने एक अहम रणनीतिक कदम उठाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने घोषणा की है कि भारत जल्द ही मॉरीशस को तेल और गैस सप्लाई करने के लिए एक बड़े समझौते को अंतिम रूप देने जा रहा है।
9वें हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान जयशंकर ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए मजबूत साझेदारी बेहद जरूरी है। यह जलमार्ग दुनिया के करीब 20% तेल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यह कदम मॉरीशस की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देगा और वैश्विक स्तर पर भारत की कूटनीतिक भूमिका को भी सशक्त करेगा। साथ ही, इससे क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
भारत पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी मॉरीशस का सहयोग कर रहा है। एक भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी मॉरीशस में पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट विकसित कर रही है। इसके अलावा, भारत जल्द ही ई-बसों की अंतिम खेप भी मॉरीशस को सौंपेगा, जिससे वहां का सार्वजनिक परिवहन अधिक पर्यावरण अनुकूल बन सके।
दोनों देश इंटरनेशनल सोलर एलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस के तहत सौर ऊर्जा और बायोफ्यूल के क्षेत्र में भी मिलकर काम कर रहे हैं।
पिछले वर्ष नरेंद्र मोदी की मॉरीशस यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंधों को “एन्हांस्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” का दर्जा दिया गया था। इसके तहत भारत ने मॉरीशस के विकास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की भी घोषणा की है।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी है, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। ऐसे में भारत का यह कदम ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक रास्ते तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और मॉरीशस ने समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया है, जो दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगा।
