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केमिस्ट से बॉलीवुड के दमदार अभिनेता बने नवाजुद्दीन सिद्दीकी, 13 साल के संघर्ष के बाद मिली पहचान

मुंबई। हिंदी सिनेमा के शानदार अभिनेताओं में शुमार Nawazuddin Siddiqui आज अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपनी दमदार एक्टिंग और अलग अंदाज़ से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले नवाजुद्दीन का सफर बेहद संघर्षों से भरा रहा है। एक समय ऐसा भी था जब वह पेट्रोकेमिकल कंपनी में केमिस्ट की नौकरी करते थे, लेकिन एक्टिंग का जुनून उन्हें मायानगरी मुंबई तक खींच लाया।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के बुढ़ाना कस्बे में जन्मे नवाजुद्दीन सिद्दीकी किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बचपन से ही उनके मन में अभिनेता बनने का सपना था, हालांकि उस समय उनके परिवार में एक्टिंग को करियर के तौर पर नहीं देखा जाता था। उन्होंने Gurukula Kangri University से साइंस में ग्रेजुएशन किया और नौकरी की तलाश में गुजरात के वडोदरा पहुंचे, जहां उन्होंने एक पेट्रोकेमिकल कंपनी में केमिस्ट के रूप में काम किया।

हालांकि नौकरी के बावजूद उनका मन अभिनय में ही रमता था। कुछ समय बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली का रुख किया। यहां थिएटर के प्रति उनका लगाव बढ़ा और उन्होंने National School of Drama में दाखिला लेकर अभिनय की बारीकियां सीखीं। संघर्ष के दिनों में खर्च चलाने के लिए उन्होंने वॉचमैन की नौकरी भी की।

मुंबई पहुंचने के बाद नवाजुद्दीन को लंबे समय तक छोटे-मोटे किरदार ही मिले। उन्होंने Sarfarosh, Shool और Munna Bhai M.B.B.S. जैसी फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाईं, लेकिन उन्हें पहचान नहीं मिल सकी।

करीब 13 साल के संघर्ष के बाद 2012 में रिलीज हुई Gangs of Wasseypur ने उनकी किस्मत बदल दी। फिल्म में फैजल खान के किरदार ने उन्हें रातोंरात लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद उन्होंने The Lunchbox, Bajrangi Bhaijaan, Raman Raghav 2.0 और Manto जैसी फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया।

इसके अलावा Sacred Games में उनके निभाए गए गणेश गायतोंडे के किरदार को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया। आज नवाजुद्दीन सिद्दीकी इंडस्ट्री के उन कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर सफलता हासिल की है।

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