नई दिल्ली/इस्लामाबाद। पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम कराने की कोशिशों के बीच एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इजरायल ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया बयान की कड़ी निंदा करते हुए उसकी “निष्पक्ष मध्यस्थ” की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम के लिए मध्यस्थता कर रहा है और 11 अप्रैल को संभावित शांति वार्ता की मेजबानी की तैयारी में है। इसी बीच ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल के खिलाफ तीखी टिप्पणी करते हुए उसे मानवता के लिए “अभिशाप” बताया और विवादित बयान दिया, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपत्तिजनक माना जा रहा है।
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि “इजरायल के खिलाफ विनाश का आह्वान करने वाला यह बयान अत्यंत आपत्तिजनक है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता, खासकर उस सरकार से जो शांति के लिए निष्पक्ष मध्यस्थ होने का दावा करती है।”
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी इस बयान की आलोचना करते हुए इसे यहूदी-विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि “ऐसे आरोप और भाषा किसी भी शांति प्रक्रिया के लिए अनुकूल नहीं हैं और इससे मध्यस्थ की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।”
उधर, पाकिस्तान की मध्यस्थता की पहल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है, लेकिन इस ताजा विवाद ने उसकी कूटनीतिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई देश शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाता है, तो उसे सभी पक्षों के प्रति संतुलित और संयमित भाषा का इस्तेमाल करना आवश्यक होता है।
मौजूदा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब गाजा, लेबनान और पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है। ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका और उसके नेताओं के बयान आने वाले दिनों में क्षेत्रीय कूटनीति को और प्रभावित कर सकते हैं।
