पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं। इसी बीच संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने भारत से मानवीय सहायता की अपील करते हुए दावा किया है कि पाकिस्तान की कार्रवाई के कारण क्षेत्र में गंभीर खाद्य और दवा संकट पैदा हो गया है।
हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसमें किए गए दावों को सत्यापित नहीं माना जा सकता।
वायरल वीडियो में अमन खान कथित तौर पर कहते हैं कि पीओके के लोग भोजन और आवश्यक वस्तुओं की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने भारत से मदद की अपील करते हुए कहा कि लोगों के पास राशन नहीं है और उन्हें मानवीय सहायता की जरूरत है।
रावलकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित एक जनसभा में अमन खान ने नियंत्रण रेखा (LoC) खोलने की मांग की। उनका कहना था कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो लोगों को भारत की ओर आने का विकल्प मिलना चाहिए। उन्होंने पुंछ और डोडा सेक्टर के जरिए भी LoC खोलने की अपील की और चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
एक अन्य वीडियो संदेश में उन्होंने श्रीनगर, बारामूला, पुंछ, राजौरी, जम्मू, लद्दाख, कारगिल और गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों से भी समर्थन की अपील की।
प्रदर्शन के 26वें दिन अमन खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने पिछले तीन सप्ताह से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में भोजन और दवाइयों की आपूर्ति रोक दी है, जिससे वहां मानवीय संकट गहरा गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
पीओके में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत महंगाई, आर्थिक संकट और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन राजनीतिक रूप ले चुका है। हाल के प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के खिलाफ और स्वतंत्रता के समर्थन में नारे लगाए हैं, जिससे क्षेत्र में बढ़ते असंतोष का संकेत मिलता है।
5 जून को पाकिस्तान की ओर से संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने और उसे कथित तौर पर “आतंकवादी संगठन” घोषित किए जाने के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आईं, जिसके चलते विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए।
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा घटनाक्रम पीओके के लोगों और वहां के प्रशासन के बीच बढ़ते अविश्वास को दर्शाता है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल दावों और खाद्य एवं दवा आपूर्ति रोकने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
