देहरादून: अपनी अनूठी खुशबू और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए मशहूर दून बासमती को दोबारा उसकी पुरानी पहचान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन, कृषि विभाग और किसानों के संयुक्त प्रयास रंग लाने लगे हैं। वर्ष 2025 में सफल ट्रायल के बाद इस वर्ष जिले में 75 हेक्टेयर क्षेत्र में दून बासमती की रोपाई शुरू हो गई है। इस अभियान से करीब 160 किसान जुड़ चुके हैं।
पिछले वर्ष प्रारंभिक स्तर पर किए गए सफल प्रयोग के बाद इस बार खेती का दायरा बढ़ाया गया है। सहसपुर और विकासनगर के अलावा अब रायपुर और डोईवाला क्षेत्र के किसान भी दून बासमती की खेती में रुचि दिखा रहे हैं। जिला प्रशासन का उद्देश्य दून बासमती को उसकी विशिष्ट सुगंध और गुणवत्ता के आधार पर एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित करना है, ताकि किसानों को बेहतर बाजार और अधिक आय मिल सके।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि वर्ष 2025 में 65 हेक्टेयर क्षेत्र में 100 से अधिक किसानों ने दून बासमती की खेती की थी। रीप (REAP) परियोजना के तहत किसानों से 200 क्विंटल से अधिक धान 65 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया और 13 लाख रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की गई। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी विपणन, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
दून बासमती के संरक्षण और संवर्धन के लिए विकासनगर में सीड बैंक स्थापित करने तथा वैज्ञानिक परीक्षण (टेस्टिंग) सुविधा विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इससे किसानों को प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराए जा सकेंगे और पारंपरिक दून बासमती की शुद्धता भी बनी रहेगी।
मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि एक समय दून बासमती की खेती करीब 550 हेक्टेयर क्षेत्र में होती थी, लेकिन समय के साथ इसका रकबा घटकर 150 से 200 हेक्टेयर तक सिमट गया। अब प्रशासन और कृषि विभाग के प्रयासों से इसकी खेती का दायरा दोबारा बढ़ाया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि प्रशासन और कृषि विभाग से मिल रहे सहयोग के कारण दून बासमती की खेती के प्रति उनका विश्वास बढ़ा है। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में न केवल इसकी खेती का क्षेत्रफल बढ़ेगा, बल्कि दून बासमती को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने से किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
