अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO पद के लिए 18 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। इन उम्मीदवारों का इंटरव्यू 11 और 12 अगस्त यानी मंगलवार और बुधवार को मंदिर परिसर में आयोजित किया जाएगा।
इस पद के लिए करीब 5,300 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदनों की जांच के बाद चयन समिति ने उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया और प्रारंभिक प्रक्रिया के बाद 18 अभ्यर्थियों को अंतिम इंटरव्यू के लिए चुना गया है।
CEO पद के लिए उम्मीदवारों का इंटरव्यू तीन सदस्यीय पैनल द्वारा लिया जाएगा। इसमें न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और शिर्डी साईंबाबा ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हवारे शामिल हैं।
इंटरव्यू के दौरान ट्रस्ट के कुछ सदस्यों के भी मंदिर परिसर में मौजूद रहने की संभावना है।
CEO की जिम्मेदारी मंदिर के प्रशासन और रोजमर्रा के कामकाज के बेहतर प्रबंधन की होगी। ऐसे में चयन प्रक्रिया में प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उम्मीदवार के लिए हिंदू होना और हिंदू धार्मिक परंपराओं एवं नियमों का पालन करना भी आवश्यक शर्तों में शामिल है। इसके अलावा पूरी तरह शाकाहारी होना तथा शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहना भी पात्रता से जुड़ी शर्तों में बताया गया है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO पद के लिए उम्मीदवारों की आयु सीमा 50 से 70 वर्ष निर्धारित की गई है। बताया गया है कि मंदिर के कामकाज को अधिक व्यवस्थित करने के उद्देश्य से ट्रस्ट ने CEO नियुक्त करने का निर्णय लिया।
प्राप्त आवेदनों की शुरुआती जांच के बाद चयन समिति ने करीब 55 उम्मीदवारों के साथ प्रारंभिक इंटरव्यू किया था। इस प्रक्रिया के बाद 18 उम्मीदवारों को अंतिम चरण के इंटरव्यू के लिए चुना गया है।
अब 11 और 12 अगस्त को इन 18 उम्मीदवारों का इंटरव्यू होगा। इसके बाद चयन समिति तीन उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट कर उनके नाम ट्रस्ट के सामने रखेगी।
CEO पद के लिए अंतिम नाम पर 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में मुहर लगने की संभावना है। इस नियुक्ति को मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दरअसल, मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट ने CEO की नियुक्ति का फैसला किया था। इन आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया था।
