ओडिशा में स्कूली पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। कक्षा-1 की नई पुस्तक ‘झूलना-1’ में राज्य गीत ‘वंदे उत्कल जननी’ और राष्ट्रगान के शब्दों में गंभीर त्रुटियां सामने आई हैं। इन गलतियों के बाद शिक्षक, अभिभावक और शिक्षा विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए पुस्तकों की समीक्षा और तत्काल सुधार की मांग की है।
सबसे गंभीर गलती ओडिशा के राज्य गीत ‘वंदे उत्कल जननी’ में पाई गई है। पुस्तक में गीत की पंक्ति “घन घन बनभूमि” की जगह “घन बनभूमि” छाप दी गई है, जिससे एक महत्वपूर्ण शब्द गायब हो गया है।
इसके अलावा राष्ट्रगान के शब्दों में भी त्रुटि सामने आई है। पुस्तक में “उत्कल” शब्द की जगह “उतलल” लिखा गया है। इस गलती ने पाठ्यपुस्तक की संपादन और प्रूफरीडिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य के कई स्कूलों को अभी तक पुस्तक की मुद्रित प्रतियां नहीं मिली हैं। फिलहाल स्कूलों को केवल पीडीएफ संस्करण उपलब्ध कराया गया है, जिसे अभिभावकों के साथ साझा किया गया है। ऐसे में डिजिटल कॉपी में ही गंभीर त्रुटियां मिलने से पुस्तक की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
शिक्षकों का कहना है कि शुरुआती कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए भाषा और वर्तनी की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसी गलतियां बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं और भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती हैं।
शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने राज्य सरकार से मांग की है कि पुस्तक की तत्काल समीक्षा कर सभी त्रुटियों को सुधारा जाए और जल्द से जल्द संशोधित एवं त्रुटिरहित पुस्तकें स्कूलों तक पहुंचाई जाएं।
यह पहली बार नहीं है जब ओडिशा की नई स्कूली किताबें विवादों में आई हैं। इससे पहले भी कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में 1,600 से अधिक त्रुटियां सामने आने की खबरें आई थीं। उस समय भी विपक्ष, शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने सरकार की कार्यप्रणाली और पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
कक्षा-1 की नई पुस्तक में फिर से सामने आई इन गलतियों ने राज्य की पाठ्यपुस्तक निर्माण, संपादन और गुणवत्ता जांच प्रणाली को लेकर बहस तेज कर दी है। अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
