Narendra Modi ने देशवासियों से एक साल तक सोने की खरीदारी और विदेश यात्रा को टालने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने हैदराबाद में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब Iran–Israel conflict और अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान के बीच जारी तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि देशवासियों को पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल बेहद सावधानी से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल जरूरत के अनुसार ईंधन का उपयोग करने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और वैश्विक संकट के असर को कम किया जा सकेगा।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसके अलावा देश में सोने की मांग का बड़ा हिस्सा भी आयात के जरिए पूरा किया जाता है। ऐसे में तेल और सोने की बढ़ती कीमतों ने भारत के आयात बिल और व्यापार घाटे पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है।
Reserve Bank of India के आंकड़ों के मुताबिक, देश का विदेशी मुद्रा भंडार हाल के सप्ताहों में तेजी से घटा है। फरवरी के रिकॉर्ड स्तर के मुकाबले इसमें अरबों डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये को संभालने के लिए आरबीआई को लगातार डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। बढ़ती वैश्विक कीमतों के कारण सोने का आयात बिल लगातार बढ़ रहा है, जिससे व्यापार घाटा भी बढ़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सोने और तेल की खपत में कमी आती है तो इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है।
हालांकि, जानकारों का कहना है कि भारत में सोना केवल निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इसकी मांग में बहुत बड़ी गिरावट की संभावना कम है।
इस बीच, सोमवार को सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महंगे कच्चे तेल और बढ़ती महंगाई की आशंका के चलते निवेशकों की रणनीति बदल रही है। इसके बावजूद, यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है तो आने वाले महीनों में सोने की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है।

