नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के बाद सरकार ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। सूत्रों के अनुसार सरकार ने इस संबंध में राज्यों से जानकारी भी मांगी है और उन शिकायतों की समीक्षा कर रही है, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को राहत मिलेगी, जबकि प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ या कानून-व्यवस्था भंग करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों को किसी भी स्थिति में छूट नहीं दी जाएगी।
इस बीच सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल आंदोलनकारियों की कानूनी सहायता कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ ही सीजेपी ने ‘साक्षी’ नामक प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है, जिसके माध्यम से उन लोगों को कानूनी सहायता दी जाएगी जिनके खिलाफ प्रदर्शन के दौरान मामले दर्ज किए गए हैं।
सौरव दास ने यह भी कहा कि यदि मंगलवार तक सरकार की ओर से लिखित समझौता नहीं मिलता है तो पार्टी दोबारा आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगी।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए थे। इसके बाद बिहार सहित कई राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन हुए और कुछ स्थानों पर हिंसक घटनाएं सामने आईं।
सरकार ने 25 जुलाई को सीजेपी की प्रमुख मांगों को स्वीकार करने की घोषणा की थी। इनमें नीट पेपर लीक मामले से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने जैसे मुद्दे शामिल थे। हालांकि, हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में कार्रवाई की खबरों के बाद सरकार ने फिर से स्पष्ट किया है कि केवल हिंसा में शामिल लोगों पर ही कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि सीजेपी ने 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से अपना आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन की प्रमुख मांग नीट पेपर लीक मामले को लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। बाद में सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल पर बैठने के बाद आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज के बाद आंदोलन और तेज हो गया तथा 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी ने अपना धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी।
