मुंबई: 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमले की जांच के दौरान पाकिस्तान-अमेरिकी आतंकी डेविड हेडली का नाम सामने आने के बाद फिल्ममेकर महेश भट्ट के बेटे राहुल भट्ट भी चर्चा में आए थे। दरअसल, राहुल की हेडली से मुलाकात हो चुकी थी। उस समय उन्हें मीडिया की आलोचना और कई सवालों का सामना करना पड़ा था। अब करीब 18 साल बाद राहुल ने उस पूरे घटनाक्रम को याद करते हुए हेडली से मुलाकात, जांच एजेंसियों की पूछताछ और मीडिया ट्रायल से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं।
राहुल ने सिद्धार्थ कन्नन के साथ बातचीत में बताया कि 26/11 हमले के बाद जब उन्होंने पहली बार टीवी पर डेविड हेडली का चेहरा देखा तो उन्हें अपनी पुरानी मुलाकात याद आ गई। उनके मुताबिक, उन्हें लगा कि हेडली के साथ उनका पुराना संपर्क अब जांच का हिस्सा बन सकता है।
‘राहुल’ नाम कोड वर्ड के तौर पर इस्तेमाल होने का दावा
राहुल ने इंटरव्यू में दावा किया कि एफबीआई के एक हलफनामे में हेडली द्वारा मुंबई के लिए ‘राहुल’ नाम का इस्तेमाल कोड वर्ड के तौर पर किए जाने का उल्लेख था। उन्होंने कहा कि टीवी पर हेडली को देखते ही उनके मन में आया कि जिस ‘राहुल’ का जिक्र हुआ है, वह वही हैं।
2007 में बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में हुई थी मुलाकात
राहुल के मुताबिक, उनकी हेडली से पहली मुलाकात 2007 में दादर में आयोजित एक बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता के दौरान हुई थी। एक कॉमन ट्रेनिंग पार्टनर के जरिए दोनों की पहचान हुई थी। राहुल ने बताया कि उस समय वह हेडली को एक अमेरिकी नागरिक के तौर पर जानते थे।
उन्होंने दावा किया कि दोनों के बीच कोई गहरी दोस्ती या व्यावसायिक साझेदारी नहीं थी। वे कभी-कभी मिलते थे, फिल्म देखते, खाना खाते या हेल्थ क्लब जाते थे। राहुल के मुताबिक, उन्हें हेडली की आपराधिक गतिविधियों की जानकारी नहीं थी।
‘बैकयार्ड’ वाली बातचीत भी याद की
राहुल ने 26/11 से पहले हुई एक बातचीत का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, एक बार दक्षिण मुंबई में ट्रैफिक के दौरान दोनों के बीच इस्लामाबाद के मैरियट होटल में हुए बम धमाके को लेकर चर्चा हुई थी। राहुल का दावा है कि इसी दौरान हेडली ने कहा था कि वह अपने ‘बैकयार्ड’ में भी ऐसी घटना होते देख सकता है।
राहुल ने बताया कि उस समय उन्होंने इस टिप्पणी को गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि, 26/11 हमले के बाद हेडली का नाम सामने आने पर उन्हें उस बातचीत का मतलब अलग नजर आया।
खुद क्राइम ब्रांच पहुंचे राहुल
हेडली का नाम सामने आने के बाद राहुल ने बताया कि वह अपनी मां की सलाह पर खुद मुंबई क्राइम ब्रांच पहुंचे थे। उनके मुताबिक, उन्होंने अधिकारियों को हेडली के साथ अपनी मुलाकात और संपर्क के बारे में जानकारी दी।
राहुल का दावा है कि इसके बाद एनआईए, आईबी और रॉ से जुड़े अधिकारियों ने उनसे करीब 30 घंटे तक पूछताछ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूछताछ एक गवाह के तौर पर हुई थी, आरोपी के तौर पर नहीं।
‘30 घंटे पूछताछ हुई, लेकिन थर्ड डिग्री नहीं’
राहुल ने कहा कि पूछताछ की प्रक्रिया लंबी थी, लेकिन उनके मुताबिक उनके साथ किसी तरह की थर्ड डिग्री नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि जांच अधिकारियों ने उनसे केवल घटनाओं से जुड़ी जानकारी और हेडली के साथ उनके संपर्क के बारे में सवाल किए।
राहुल ने यह भी दावा किया कि जांच के दौरान उनके खिलाफ कोई ईमेल, इंटरसेप्ट या अन्य आपराधिक सबूत नहीं मिला।
मीडिया ट्रायल को लेकर बोले राहुल
26/11 के बाद हुई मीडिया रिपोर्टिंग को याद करते हुए राहुल ने कहा कि उन्हें काफी आलोचना और सार्वजनिक नफरत का सामना करना पड़ा। उनके मुताबिक, मीडिया के एक वर्ग ने उन्हें ‘आतंकवादी का दोस्त’ तक बताया।
राहुल ने कहा कि उन्होंने इस पूरे दौर का सामना इसलिए किया क्योंकि उन्हें खुद पर भरोसा था। उनका कहना है कि उन्होंने किसी आपराधिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया था और जांच में भी वह गवाह के तौर पर शामिल हुए थे।
मुश्किल दौर में पिता महेश भट्ट के करीब आए
राहुल ने इस दौरान अपने पिता महेश भट्ट के साथ रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि विवाद के दौरान कुछ समय के लिए उनके पिता उनके करीब आए और दोनों के बीच पहले की तुलना में ज्यादा बातचीत हुई। हालांकि, राहुल के मुताबिक यह नजदीकी लंबे समय तक कायम नहीं रही और बाद में दोनों के बीच फिर दूरी बढ़ गई।
राहुल ने इस इंटरव्यू में 26/11 मामले से जुड़े अपने अनुभवों के साथ-साथ पिता महेश भट्ट के साथ अपने रिश्ते और उस दौर में झेली गई परिस्थितियों पर भी विस्तार से बात की।
