नई दिल्ली: केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस की जांच में कथित तौर पर सिया गोयल और उसके सह-आरोपी चेतन चौधरी के बीच हुई कोडवर्ड और निकनेम वाली बातचीत का पता चला है। वहीं, चेतन के वकील ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे गैर-कानूनी बताया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, सिया के मोबाइल से डिलीट किए गए डेटा को रिकवर किया गया है। इसमें कथित तौर पर सामने आया कि सिया और चेतन बातचीत के दौरान निकनेम और संकेतों का इस्तेमाल करते थे ताकि उनकी बातचीत पर किसी को संदेह न हो। पुलिस का कहना है कि इन संदेशों की जांच की जा रही है ताकि हत्या की कथित साजिश से उनका संबंध स्पष्ट किया जा सके।
इस बीच, एक कथित स्नैपचैट चैट भी जांच के दायरे में है। दावा किया जा रहा है कि सिया ने अपनी एक दोस्त से कहा था कि जिस शादी का होना ही नहीं है, उसके लिए फ्लाइट टिकट बुक करनी है और इसके लिए उसका आधार कार्ड मांगा था। बताया जा रहा है कि यह बातचीत 25 मई के आसपास हुई थी, जबकि 30 मई से केतन पर कथित हमलों की शुरुआत हुई। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या फ्लाइट टिकट बुक कराने की योजना हत्या के बाद जांच को भटकाने की कथित साजिश का हिस्सा थी। हालांकि, इस चैट की सत्यता की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मामले की सुनवाई के दौरान नार्को टेस्ट का मुद्दा भी उठा। अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी का नार्को टेस्ट उसकी सहमति के बिना नहीं कराया जा सकता। चूंकि सिया और चेतन ने सहमति नहीं दी, इसलिए अदालत ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया। अभियोजन पक्ष ने भी नार्को टेस्ट को आवश्यक नहीं बताया।
दूसरी ओर, चेतन चौधरी के वकील राधेशिकेश उत्तरवार ने दावा किया है कि उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार नहीं हुई। उनका आरोप है कि पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज समय से कई घंटे पहले चेतन को उसके घर से उठाया गया था। उन्होंने अदालत से गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने, पुलिस अधीक्षक कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और उसे पेश करने का निर्देश देने की मांग की है। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख तय की है।
पुलिस ने अदालत से आरोपियों की हिरासत बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि सिया और चेतन से आमने-सामने पूछताछ आवश्यक है, ताकि उनके बीच हुई कथित कोडवर्ड बातचीत का अर्थ, उद्देश्य और हत्या की साजिश से उसका संबंध स्पष्ट किया जा सके। जांच अधिकारी के अनुसार, मामले से जुड़े अन्य डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों की भी जांच जारी है।
फिलहाल, मामले में सामने आए सभी दावों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। पुलिस और बचाव पक्ष अपने-अपने दावे अदालत के समक्ष रख रहे हैं। मामले के कई अहम पहलुओं पर अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
