वॉशिंगटन: अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे विदेशी पेशेवरों, खासकर भारतीय आईटी कर्मचारियों के लिए एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका की सीनेट में H-1B वीजा कार्यक्रम में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखने वाला एक नया बिल पेश किया गया है। इस बिल में अगले तीन वर्षों तक नए H-1B वीजा जारी करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव शामिल है।
यह बिल मोंटाना से रिपब्लिकन सीनेटर टिम शीही ने पेश किया है। उन्होंने कहा कि H-1B कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष कौशल वाले पदों पर कर्मचारियों की कमी को पूरा करना था, लेकिन अब इसका इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम लागत वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, इस व्यवस्था में सुधार कर अमेरिकी नागरिकों को रोजगार में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
H-1B एक नॉन-इमिग्रेंट वर्क वीजा है, जिसके माध्यम से अमेरिकी कंपनियां तकनीकी और विशेषज्ञता वाले पदों पर विदेशी पेशेवरों की नियुक्ति करती हैं। भारत और चीन जैसे देशों के हजारों इंजीनियर, आईटी विशेषज्ञ और अन्य पेशेवर हर साल इसी वीजा के जरिए अमेरिका में नौकरी करते हैं। अमेरिका की कई बड़ी टेक कंपनियां भी कुशल कर्मचारियों की भर्ती के लिए इस कार्यक्रम पर निर्भर रहती हैं।
सीनेटर टिम शीही द्वारा पेश किए गए “End H-1B Abuse Act” में कई बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है, जिनमें शामिल हैं:
अगले तीन साल तक नए H-1B वीजा जारी करने पर रोक।
ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित 1 लाख डॉलर की H-1B वीजा फीस को कानूनी मान्यता देना, जिसे पहले एक संघीय अदालत ने रद्द कर दिया था।
मौजूदा रैंडम लॉटरी सिस्टम की जगह स्थायी वेतन-आधारित चयन प्रणाली लागू करना।
एक कर्मचारी के एक साथ कई नियोक्ताओं के लिए काम करने पर रोक।
थर्ड-पार्टी स्टाफिंग एजेंसी मॉडल पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में वीजा प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाना।
अभी कानून नहीं बना है
हालांकि, यह प्रस्ताव फिलहाल केवल सीनेट में पेश किया गया बिल है। इसे कानून बनने के लिए सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) दोनों से पारित होना होगा और अंत में राष्ट्रपति की मंजूरी भी आवश्यक होगी। इसलिए फिलहाल H-1B वीजा नियमों में कोई तत्काल बदलाव लागू नहीं हुआ है।
यदि यह बिल भविष्य में कानून का रूप लेता है, तो इसका सबसे अधिक असर भारतीय आईटी पेशेवरों और उन अमेरिकी कंपनियों पर पड़ सकता है, जो विदेशी विशेषज्ञों की भर्ती के लिए H-1B वीजा कार्यक्रम पर निर्भर हैं।
