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महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में देर रात तक बहस, आज होगा ऐतिहासिक मतदान

नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल को लेकर लोकसभा में गुरुवार को देर रात तक जोरदार बहस चली। इस दौरान सदन की कार्यवाही कई बार बढ़ाई गई और रात करीब 1:20 बजे तक चर्चा जारी रही। लोकसभा स्पीकर Om Birla ने महिला सांसदों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए इसे ऐतिहासिक क्षण बताया।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले इस बिल पर आज शाम 4 बजे मतदान होना है। इसे देश की आधी आबादी के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

संसद की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, जिसके बाद पक्ष और विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं ने बिल पर अपनी राय रखी। गृहमंत्री Amit Shah, समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav, कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi, सांसद Asaduddin Owaisi सहित कई नेताओं ने चर्चा में हिस्सा लिया। वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी सदन में भाषण देते हुए सभी दलों से इस बिल के समर्थन की अपील की।

दोपहर 12 बजे बिल के प्रस्ताव पर वोटिंग कराई गई, जिसमें 251 सांसदों ने समर्थन किया जबकि 185 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। इसके बाद भी चर्चा जारी रही और देर रात तक महिला सांसदों को बोलने का मौका दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि इस विधेयक को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए और सभी दलों को मिलकर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए इसे पारित करना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से भी सहयोग की अपील की।

हालांकि विपक्ष ने बिल का समर्थन करते हुए कुछ आपत्तियां भी उठाईं। विपक्षी दलों का कहना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन (डिलिमिटेशन) से अलग किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि मौजूदा स्वरूप में यह बिल ओबीसी वर्ग के हितों को प्रभावित कर सकता है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस बिल के जरिए संविधान के मूल ढांचे को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ओबीसी वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व नहीं देना चाहती।

वहीं बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने इन आरोपों का जवाब देते हुए सरकार का बचाव किया और प्रधानमंत्री मोदी को महिलाओं के अधिकारों का समर्थक बताया। उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

गृहमंत्री अमित शाह ने भी सीटों के परिसीमन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि प्रस्तावित बदलाव से दक्षिण भारत के राज्यों को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलेगा और सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।

कुल मिलाकर, महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद में गहन चर्चा के बाद अब सभी की निगाहें आज होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जो भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव ला सकता है।

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