onwin giriş
Home देश

Supreme Court of India का बड़ा निर्णय: नफरत फैलाने वाले भाषण पर मौजूदा कानून पर्याप्त

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़े मामलों पर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि देश में पहले से मौजूद आपराधिक कानून ऐसे कृत्यों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस विषय में अतिरिक्त हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

न्यायमूर्ति Vikram Nath और न्यायमूर्ति Sandeep Mehta की पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि यह कहना उचित नहीं है कि नफरत फैलाने वाले भाषण से निपटने के लिए कोई कानून नहीं है।

पीठ ने कहा कि नए कानून बनाना या पुराने कानूनों में संशोधन करना केंद्र सरकार और विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय ने सुझाव दिया कि आवश्यकता पड़ने पर Law Commission of India की वर्ष 2017 की 267वीं रिपोर्ट के आधार पर बदलाव पर विचार किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि संविधान के अनुसार न्यायपालिका की भूमिका कानून की व्याख्या तक सीमित है। न्यायालय स्वयं नए कानून नहीं बना सकता और न ही अपराधों की परिभाषा का विस्तार कर सकता है।

पीठ ने कहा कि नफरत फैलाने वाले भाषण और अफवाहें समाज में भाईचारे, गरिमा और संवैधानिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं, इसलिए इनसे सख्ती से निपटना आवश्यक है।

न्यायालय ने कहा कि वर्तमान आपराधिक ढांचा—जिसमें Indian Penal Code (भारतीय दंड संहिता) और Bharatiya Nyaya Sanhita (भारतीय न्याय संहिता), साथ ही Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता)—ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए पर्याप्त है।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि संज्ञेय अपराध सामने आने पर प्राथमिकी दर्ज करना पुलिस की अनिवार्य जिम्मेदारी है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो कानून में इसके लिए प्रभावी उपाय उपलब्ध हैं।

उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने 20 जनवरी को इस मामले में निर्णय सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत आदेश अभी जारी होना शेष है।

Similar Posts

© 2015 News Way· All Rights Reserved.