onwin giriş
Home बिज़नेस

सोना बना भारतीय परिवारों का ‘साइलेंट वेल्थ क्रिएटर’, 2011–2025 के आंकड़ों ने बदली सोच

नई दिल्ली। कभी विदेशी मुद्रा पर बोझ और गैर-उत्पादक निवेश माने जाने वाला सोना आज भारतीय परिवारों के लिए सबसे बड़े संपत्ति सृजन के साधनों में शामिल हो गया है। 2011 से 2025 के बीच के आंकड़े इस बदलाव को साफ तौर पर दिखाते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि इन आंकड़ों की व्याख्या सावधानी से करनी चाहिए।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में भारत ने करीब 12,670 टन सोना आयात किया, जिस पर लगभग 609 अरब डॉलर खर्च हुए। 2026 में वैश्विक बाजार में सोने की कीमत करीब 4,677 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचने के बाद, इसी सोने का कुल मूल्य बढ़कर लगभग 1.9 ट्रिलियन डॉलर आंका जा रहा है। इस तरह कीमतों में बढ़ोतरी से करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर की अतिरिक्त संपत्ति बनी है।
अर्थ भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स आईएफएससी एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर सचिन सावरिकर के मुताबिक, यह बढ़त भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार से भी अधिक है, जो सोने की दीर्घकालिक ताकत को दर्शाती है।

वर्षवार आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्षों में खरीदा गया सोना आज कई गुना मूल्य का हो चुका है। उदाहरण के तौर पर, 2015 में करीब 35 अरब डॉलर में आयात किया गया सोना आज लगभग 157 अरब डॉलर का हो गया है, जो करीब 350 प्रतिशत का लाभ दर्शाता है। इसी तरह 2018 में खरीदे गए सोने का मूल्य चार गुना से अधिक बढ़ चुका है।
कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में कम आयात के बावजूद खरीदा गया सोना भी मौजूदा कीमतों पर लगभग तीन गुना हो चुका है। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि लंबी अवधि में सोना निवेशकों के लिए लाभकारी साबित हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा सही नहीं है कि 2011 से 2025 के बीच हर साल सोने की कीमत दोगुनी हुई। दरअसल, इन गणनाओं में अलग-अलग वर्षों में खरीदे गए सोने की तुलना 2026 की मौजूदा कीमत से की गई है, जिससे रिटर्न ज्यादा दिखाई देता है।
हकीकत यह है कि सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव आता रहा है। 2011 से 2015 के बीच कीमतों में गिरावट देखी गई, जबकि 2020 में महामारी के दौरान तेजी आई। 2022 में फिर नरमी आई और उसके बाद 2023 से 2025 के बीच कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला।

साल 2025 सोने के लिए बेहद शानदार रहा। इस दौरान कीमतों ने 50 से अधिक बार नया रिकॉर्ड बनाया और डॉलर के लिहाज से करीब 67 प्रतिशत का सालाना रिटर्न दिया। भारतीय निवेशकों के लिए रुपये की कमजोरी के कारण यह रिटर्न लगभग 73 प्रतिशत तक पहुंच गया।
2026 में सोने की कीमतों में कुछ स्थिरता देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज बढ़त के बाद यह ठहराव सामान्य प्रक्रिया है और इसे गिरावट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार सोने की मजबूती के पीछे कई कारण हैं:

  • वैश्विक स्तर पर बढ़ता सरकारी कर्ज
  • केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी
  • रियल यील्ड पर दबाव
  • आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित निवेश की मांग

सोना लंबे समय में भारतीय परिवारों के लिए एक मजबूत निवेश विकल्प साबित हुआ है। हालांकि, इसे लेकर अत्यधिक दावों से बचना जरूरी है। सोना न केवल संपत्ति को सुरक्षित रखने का माध्यम है, बल्कि सही समय और धैर्य के साथ यह निवेशकों को अच्छा रिटर्न भी दे सकता है।

Similar Posts

© 2015 News Way· All Rights Reserved.