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मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर संकल्पबद्ध है

राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में समिति की अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश की जनजातियों को इसके दायरे में लाने के संबंध में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। इस दिशा में काम चल रहा है। समिति चाहती है कि जल्द से जल्द ड्राफ्ट तैयार कर इसे सरकार को सौंपा जाए। वहीं सीएम ने समिति के अब तक के कार्यों पर खुशी जताई।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर संकल्पबद्ध है। सरकार नागरिकों से किए हर वादे को पूरा करेगी। प्रदेशवासी समान नागरिक संहिता के संबंध में इसके लिए गठित समिति को अपने सुझाव दें। समिति का ड्राफ्ट दूसरे राज्यों के लिए अनुकरणीय होगा।

प्रदेश में समान नागरिक संहिता के सुझावों के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने सचिवालय में मुख्यमंत्री से भेंट की। मुख्यमंत्री ने समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ विचार विमर्श किया। सीएम ने कहा कि प्रदेश की जनता से वादा किया था कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लागू किया जाएगा। पहली कैबिनेट में इसके ड्राफ्ट के लिए समिति के गठन को मंजूरी दी गई।

मुख्यमंत्री ने समिति के अब तक के कार्यों पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ समिति ने तेजी से काम किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विशेषज्ञ समिति प्रबुद्धजनों के साथ आमजन से सुझाव प्राप्त कर प्रदेश की जनता के लिए हितकारी समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करेगी। यह दूसरे प्रदेशों के लिए भी अनुकरणीय होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम समान नागरिक संहिता के रूप में आजादी के अमृत काल में एक बड़ी इबारत लिखने जा रहे हैं। सीएम से मिलने वालों में जस्टिस प्रमोद कोहली (सेनि.), पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, मनु गौड़, प्रो. सुरेखा डंगवाल, अजय मिश्रा, मुख्य सचिव एसएस संधु, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी आदि शामिल रहे।

विशेषज्ञ समिति की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने कहा कि प्रदेश के लोग समिति को सात अक्तूबर तक अपने सुझाव दें।
प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लेकर गठित समिति की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (सेनि) ने कहा कि समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं है। इस संबंध में अभी कई लोगों से बात होनी है। राज्य के लोगों से सुझाव भी मांगे जा रहे हैं। इतना जरूर है कि समिति इस काम को जल्द पूरा करने का प्रयास कर रही है।राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में समिति की अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश की जनजातियों को इसके दायरे में लाने के संबंध में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। इस दिशा में काम चल रहा है। समिति चाहती है कि जल्द से जल्द ड्राफ्ट तैयार कर इसे सरकार को सौंपा जाए। अच्छे सुझावों को रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

समिति के सदस्य एवं पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि समिति उत्तराखंड के साथ ही अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर रही है। विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार, विरासत, गोद लेना, रखरखाव व संरक्षित लोगों के व्यक्तिगत मामले होते हैं। अंग्रेजों के समय में इसे लेकर अलग कानून था। देश आजाद होने के बाद अलग कानून बना। उन्होंने कहा कि सरकार जो कानून बना रही है उसमें किसी धर्म की बात नहीं कही गई है। समान नागरिक संहिता को लेकर सभी विकल्प खुले हैं।

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