एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट AI2379 में हुई गंभीर तकनीकी गड़बड़ी और पायलट के ड्रग टेस्ट में मारिजुआना की पुष्टि के मामले ने विमानन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना को केंद्र सरकार ने बेहद गंभीरता से लेते हुए एयर इंडिया प्रबंधन को कड़ी चेतावनी दी है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया के सीईओ को तलब कर सुरक्षा व्यवस्था में कथित चूक पर जवाब मांगा है। साथ ही, डीजीसीए को पायलटों के ड्रग और डोप टेस्ट के नियम और सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
फुकेत से दिल्ली आ रही AI2379 में करीब 145 यात्री सवार थे। ओडिशा के ऊपर उड़ान के दौरान विमान में कई तकनीकी चेतावनियां सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम, दरवाजे और एलिवेटर से जुड़े अलर्ट मिले, जबकि ऑटोपायलट भी बंद हो गया।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब विमान की ऊंचाई करीब 300 फीट कम हो गई। इस दौरान हुए तेज उतार-चढ़ाव के कारण 20 यात्री और चार केबिन क्रू सदस्य घायल हुए।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब पिछले साल हुए एयर इंडिया के अहमदाबाद विमान हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी।
सरकार ने कहा- जिम्मेदारी तय होगी
सरकार ने एयर इंडिया प्रबंधन को अपने ऑपरेशनल सिस्टम और सुरक्षा निगरानी को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, एविएशन सेक्रेटरी समीर सिन्हा ने एयरलाइन अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जांच में यदि किसी व्यक्ति की लापरवाही या गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने एयरलाइन से सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी को बेहतर बनाने और ऑपरेशनल स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा है।
पायलट का ड्रग टेस्ट निकला पॉजिटिव
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू फुकेत-दिल्ली फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड (PIC) का ड्रग टेस्ट है। जांच में उनके सैंपल में मारिजुआना की पुष्टि हुई है। पायलट ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि निजी समस्याओं के कारण उन्हें नींद की गोलियां लेने की सलाह दी गई थी और उनका दावा है कि इन्हीं दवाओं की वजह से टेस्ट का परिणाम पॉजिटिव आया।
हालांकि, जांच एजेंसियां इस दावे की भी जांच कर रही हैं। उड़ान के दौरान पायलट के कथित व्यवहार को लेकर केबिन क्रू की शिकायतों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, पायलट के व्यवहार को लेकर ऐसे आरोप सामने आए हैं कि वह बार-बार कॉकपिट के फर्श पर बैठ रहे थे और धूम्रपान करने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद केबिन क्रू को हस्तक्षेप करना पड़ा। हालांकि, इन आरोपों और पायलट के ड्रग टेस्ट से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
DGCA के नियम होंगे और सख्त
इस घटना के बाद सरकार ने डीजीसीए को पायलटों के ड्रग/डोप टेस्टिंग सिस्टम की समीक्षा करने और नियमों को और सख्त करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी उड़ान के संचालन में शामिल पायलट किसी ऐसे पदार्थ के प्रभाव में न हों, जिससे यात्रियों और विमान की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
AI2379 की घटना ने एक बार फिर विमानन क्षेत्र में पायलट फिटनेस, ड्रग टेस्टिंग, तकनीकी निगरानी और एयरलाइन की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस घटना के लिए तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या अन्य किसी कारण की कितनी भूमिका थी।
