उत्तराखंड तेजी से विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। चारधाम यात्रा के साथ-साथ राज्य के अन्य प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार प्रदेश के प्राचीन मंदिरों के विकास, पर्यटन सर्किट के विस्तार और तीर्थस्थलों पर आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव अब पर्यटन और धार्मिक यात्राओं के आंकड़ों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
पर्यटन विभाग के जनवरी से जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, अल्मोड़ा स्थित जागेश्वर धाम में इस वर्ष 1,74,119 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 67,875 थी। यानी यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगभग ढाई गुना बढ़ गई है। इसी तरह रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण मंदिर में इस वर्ष 3,40,385 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि वर्ष 2025 की पहली छमाही में यह आंकड़ा 1,36,120 था।
चंपावत के प्रसिद्ध पूर्णागिरि धाम में भी आस्था का बड़ा उछाल देखने को मिला है। इस वर्ष जून तक यहां 20,91,788 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 14,35,290 लोगों ने दर्शन किए थे। वहीं श्रीनगर स्थित मां धारी देवी मंदिर में इस वर्ष 5,42,626 श्रद्धालु पहुंचे, जो पिछले वर्ष के 2,83,275 श्रद्धालुओं की तुलना में लगभग दोगुनी संख्या है।
चारधाम यात्रा भी इस वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। यात्रा के 105 दिनों में 45,84,375 श्रद्धालु चारधाम के दर्शन कर चुके हैं। वहीं बद्रीनाथ धाम ने भी रिकॉर्ड प्रदर्शन किया है। यात्रा के पहले 100 दिनों में यहां 15,52,021 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3,11,613 अधिक हैं।
उत्तरकाशी स्थित यमुनोत्री धाम ने भी इतिहास रच दिया है। कठिन पैदल यात्रा के बावजूद 2 अगस्त तक 6,54,958 श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन कर चुके हैं, जो धाम के इतिहास में अब तक की सर्वाधिक संख्या है। इससे पहले वर्ष 2025 में 6,44,637 श्रद्धालु यहां पहुंचे थे।
पिथौरागढ़ स्थित आदि कैलाश धाम में भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष 1 मई से शुरू हुई यात्रा के मात्र दो महीनों में 52,441 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद आदि कैलाश यात्रा को नई पहचान मिली और तब से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
नैनीताल जिले का प्रसिद्ध कैंची धाम भी आस्था का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। जनवरी से जून 2026 के बीच यहां 24,34,507 श्रद्धालु पहुंचे। इनमें अकेले जून माह में 8.66 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन किए, जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है।
इसके अलावा ऋषिकेश से सटे मुनिकीरेती, तपोवन और शिवपुरी क्षेत्र भी धार्मिक और साहसिक पर्यटन का प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं। जनवरी से जून के बीच यहां 15,97,439 पर्यटक पहुंचे, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। वहीं कार्तिक स्वामी और सुरकंडा देवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को साकार करने के लिए प्राचीन मंदिरों का संरक्षण एवं विकास, तीर्थस्थलों पर आधुनिक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, सड़क और परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने तथा पर्यटन सर्किट विकसित करने पर तेजी से काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को भी मजबूती मिलेगी।
