डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव (डी. वाई.) पाटिल का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कोल्हापुर के कसबा बावड़ा स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से शिक्षा जगत, सामाजिक क्षेत्र और राजनीतिक जगत में शोक की लहर है।
डॉ. डी. वाई. पाटिल का जन्म 22 अक्टूबर 1935 को एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत जनसेवा से की और बाद में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बनाया। वे डी. वाई. पाटिल ग्रुप के संस्थापक थे। उनके नेतृत्व में देशभर में 182 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों, सात विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों, इंजीनियरिंग कॉलेजों, कृषि महाविद्यालयों और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विशाल नेटवर्क की स्थापना हुई। भारत के अलावा जापान में भी शैक्षणिक संस्थान स्थापित कर उन्होंने भारतीय शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
राजनीतिक जीवन में भी डॉ. पाटिल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कांग्रेस के नेता के रूप में महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य और राज्य मंत्रिमंडल में जिम्मेदारियां निभाईं। बाद में उन्हें क्रमशः बिहार के राज्यपाल, त्रिपुरा के राज्यपाल और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। वर्ष 2018 में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का दामन भी थामा, हालांकि वे सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रहे।
डॉ. पाटिल ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1957 में कोल्हापुर के महापौर के रूप में की। इसके बाद 1967 से 1972 तक महाराष्ट्र विधानसभा के विधायक रहे। इस दौरान उन्होंने आम जनता के हित, न्याय और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से विधानसभा में उठाया। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके योगदान को देशभर में लंबे समय तक याद किया जाएगा।
उनके पार्थिव शरीर को बुधवार सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे कसबा बावड़ा स्थित ‘यशवंत निवास’ से उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनका अंतिम संस्कार कोल्हापुर के लाइन बाजार स्थित डॉ. डी. वाई. पाटिल मेडिकल कॉलेज परिसर में किया जाएगा।
डॉ. डी. वाई. पाटिल अपने पीछे समृद्ध शैक्षणिक विरासत छोड़ गए हैं। वे कांग्रेस के विधान परिषद दल के नेता सतेज पाटिल और डी. वाई. पाटिल समूह के प्रमुख संजय पाटिल के पिता थे, जबकि कोल्हापुर दक्षिण के पूर्व विधायक ऋतुराज पाटिल उनके पौत्र हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसेवा के क्षेत्र में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
