लोकसभा से पारित होने के बाद Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता Mallikarjun Kharge ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यह बिल पेपर लीक की समस्या का स्थायी समाधान नहीं, बल्कि छात्रों के गुस्से को शांत करने की कोशिश है। उन्होंने सरकार से विपक्ष के सुझावों पर गंभीरता से विचार करने की अपील भी की।
खड़गे ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं के कारण लाखों छात्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन नए संशोधन विधेयक में कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं देता। उनके मुताबिक, भारी जुर्माना, कड़ी सजा, स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट-ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान पहले भी मौजूद थे, जबकि इस संशोधन में केवल आंकड़ों और कुछ प्रावधानों में बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए बिना केवल कानून सख्त करने से समस्या का समाधान संभव नहीं है।
विपक्ष के नेता ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने वर्ष 2024 में ही पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत कानून और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उस समय इन सुझावों को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक बदलाव तभी आएगा जब परीक्षा आयोजित करने की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा।
खड़गे ने आरोप लगाया कि यह विधेयक छात्रों के आंदोलन और बढ़ते असंतोष को देखते हुए लाया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छात्र सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे, तब सरकार ने उनसे संवाद क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं की समस्याओं का समाधान बातचीत और संस्थागत सुधारों के माध्यम से करना चाहिए।
चर्चा के दौरान खड़गे ने यह भी कहा कि Rahul Gandhi वर्ष 2024 से लगातार पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं। उन्होंने मांग की कि Narendra Modi स्वयं संसद में आकर इस विषय पर बयान दें। साथ ही उन्होंने छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई, मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और बिहार में प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग के आरोपों पर भी सरकार से जवाब मांगा।
