संसद परिसर में चाय-बिस्किट खाने को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक नए विवाद में घिर गए हैं। इस मामले में पूर्व सैनिकों और वरिष्ठ अधिकारियों के एक समूह ने पत्र जारी कर उनसे माफी की मांग की है।
जारी पत्र में कहा गया है कि भारत की संसद देश के संवैधानिक ढांचे में एक अत्यंत उच्च और सम्मानजनक स्थान रखती है। संसद की गरिमा केवल परंपरा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे हर हाल में बनाए रखना आवश्यक है।
पत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि संसद भवन के भीतर केवल लोकसभा और राज्यसभा कक्ष ही नहीं, बल्कि सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी भी उसी गरिमा और मर्यादा के दायरे में आते हैं। ऐसे में इन स्थानों पर किसी भी प्रकार का व्यवहार संस्था की प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
पूर्व सैनिकों ने 12 मार्च की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि संसद परिसर के भीतर प्रदर्शन या विरोध पर पहले से प्रतिबंध है, इसके बावजूद राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने नियमों की अनदेखी की। उनका आरोप है कि यह कदम संसदीय प्रक्रिया और मर्यादा के खिलाफ है।
विवाद उस समय बढ़ा जब राहुल गांधी और अन्य सांसदों को संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्किट खाते हुए देखा गया। पत्र में इसे “अशोभनीय आचरण” बताते हुए कहा गया कि संसद की सीढ़ियां किसी राजनीतिक प्रदर्शन या तमाशे का स्थान नहीं हैं।
पूर्व सैनिकों ने अपने पत्र में यह भी कहा कि इस तरह का व्यवहार शिष्टाचार के मानकों की अनदेखी करता है और इससे संसदीय गरिमा को ठेस पहुंचती है। उन्होंने मांग की कि राहुल गांधी इस मामले में देश से माफी मांगें और अपने आचरण पर आत्ममंथन करें, ताकि संसद की प्रतिष्ठा और संस्थागत पवित्रता बनी रहे।
फिलहाल, इस मुद्दे पर राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
