अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन पर तैनात नौसैनिकों की मानसिक स्थिति और लंबे समय से जारी तैनाती को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ नाविकों ने समुद्र में कूदकर जान देने की कोशिश की या ऐसा करने के विचार व्यक्त किए। इन घटनाओं के बाद सैन्य परिवारों और अमेरिकी सांसदों ने नौसैनिकों की परिस्थितियों पर चिंता जताई है।
इसी बीच अमेरिका मिडिल ईस्ट में USS अब्राहम लिंकन की जगह एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज वॉशिंगटन भेजने की तैयारी कर रहा है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव पहले से तय रोटेशन का हिस्सा है और इसे लिंकन पर सामने आई चिंताओं की सीधी प्रतिक्रिया के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
द गार्जियन और द हिल की रिपोर्टों के अनुसार, अब्राहम लिंकन पर ऐसी कई घटनाओं की जानकारी सामने आई है, जिनमें कुछ नाविकों ने समुद्र में कूदने का विचार किया या ऐसा करने की कोशिश की। कम से कम एक मामले में एक साथी नाविक ने दूसरे क्रू मेंबर को ऐसा कदम उठाने से रोक दिया।
नौसैनिकों के परिवारों ने भी उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। सैन डिएगो में करीब 200 परिवारों की एक टाउन हॉल बैठक में ऐसे अनुभव सामने आए, जिनमें लंबे समय तक समुद्र में रहने के कारण नाविकों पर पड़ रहे मानसिक दबाव का जिक्र किया गया।
डेमोक्रेटिक सांसद माइक लेविन ने जहाज पर मौजूद परिस्थितियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनके मुताबिक, कुछ नाविकों को फफूंद लगे शावर, खराब शौचालय, लंबे समय से बंद लॉन्ड्री और गर्म पानी की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि कुछ समय पर व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी जरूरी चीजों और भोजन की उपलब्धता को लेकर भी दिक्कतें थीं। इन परिस्थितियों ने लंबे समय से तैनात क्रू की थकान और मानसिक दबाव को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
अमेरिकी नौसेना ने आत्महत्या के प्रयासों में बढ़ोतरी की बात से इनकार किया है। नौसेना के एक अधिकारी के मुताबिक, कमांड के पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर जहाज पर आत्महत्या के विचारों या प्रयासों में कोई वृद्धि नहीं देखी गई है।
नौसेना ने यह भी कहा कि नाविकों के स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जहाज पर स्वच्छ पानी, काम करने वाले एयर कंडीशनिंग सिस्टम और पौष्टिक भोजन के विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन पर करीब 5,000 नौसैनिक और मरीन तैनात हैं। यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर 21 नवंबर को सैन डिएगो से रवाना हुआ था और शुरुआत में इसकी तैनाती प्रशांत क्षेत्र के लिए निर्धारित थी।
लंबी होती गई तैनाती के कारण क्रू को 250 से ज्यादा दिन समुद्र में बिताने पड़े। इसी वजह से नौसैनिकों में थकान और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, USS जॉर्ज वॉशिंगटन हाल ही में वियतनाम के दा नांग से रवाना हुआ है और सिंगापुर तथा मलक्का जलडमरूमध्य से गुजरते हुए हिंद महासागर की ओर बढ़ रहा है। इसके बाद उसे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में तैनात किए जाने की तैयारी है।
हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कैरियर की अदला-बदली नियमित रोटेशन का हिस्सा है, लेकिन यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब USS अब्राहम लिंकन के क्रू की थकान, मानसिक स्वास्थ्य और जहाज पर रहने की परिस्थितियों को लेकर सार्वजनिक चिंता बढ़ गई है।
