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नंदा-सुनंदा महोत्सव में शामिल हुए सीएम धामी, बोले- ‘विकास भी और विरासत भी’

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल में आयोजित माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव में प्रतिभाग किया। उन्होंने माँ नंदा-सुनंदा के श्रीचरणों में नमन कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने महोत्सव में मौजूद माताओं-बहनों, वरिष्ठजनों, युवाओं और बच्चों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

आस्था और संस्कृति का उत्सव है नंदा देवी महोत्सव

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि नैनीताल का नंदा देवी महोत्सव केवल एक मेला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का उत्सव है। माँ नंदा-सुनंदा के स्वागत की परंपरा के साथ लोकगीत, झोड़ा-चांचरी और ढोल-दमाऊं जैसी लोक परंपराएं भी इस महोत्सव के माध्यम से जीवंत होती हैं।

उन्होंने कहा कि नैनीताल अपनी झील, पहाड़ों और हरी-भरी वादियों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इसकी पहचान केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। यहां माँ नैना देवी, हनुमानगढ़ी और कैंची धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। वहीं मुक्तेश्वर में भगवान शिव का पावन धाम भी स्थित है। प्रकृति और अध्यात्म का यह संगम नैनीताल को अलग पहचान देता है।

‘विकास भी और विरासत भी’ के मंत्र पर आगे बढ़ रहा उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के साथ देवभूमि को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि केदारखंड की तर्ज पर कुमाऊं क्षेत्र में मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत प्रमुख पौराणिक और धार्मिक स्थलों को विकसित किया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्राचीन विरासत के मूल स्वरूप को संरक्षित रखना है। माँ नैना देवी, कैंची धाम और मुक्तेश्वर सहित धार्मिक स्थलों के विकास से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

धार्मिक पर्यटन से रोजगार के अवसर बढ़ने की बात

सीएम धामी ने कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही मातृशक्ति को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा और उत्तराखंड के स्थानीय उत्पाद देश-दुनिया तक पहुंचेंगे।

उन्होंने कहा कि नैनीताल जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पर्यटन और कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी सरकार का ध्यान है। प्रयास है कि पहाड़ के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े।

भूमि और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के साथ उत्तराखंड की भूमि, संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने भूमि कानूनों में किए गए प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि 11 पर्वतीय जिलों में बाहरी राज्यों के लोगों द्वारा कृषि और उद्यान श्रेणी की भूमि खरीद पर रोक का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने देवभूमि की संस्कृति और पहचान के संरक्षण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और लैंड जिहाद तथा लव जिहाद के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।

UCC और युवाओं को रोजगार का किया जिक्र

सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड में महिलाओं के अधिकारों और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से समान नागरिक संहिता लागू की गई है। उन्होंने बताया कि राज्य में UCC 27 जनवरी 2025 से प्रभावी है।

युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता के लिए नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उनके अनुसार अब तक 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में रोजगार का अवसर मिला है।

महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा बेहतर बाजार

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की माताओं और बहनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों और अन्य माध्यमों से स्थानीय उत्पाद तैयार करने वाली महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूहों को ₹5 लाख तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने के साथ उनके हुनर को व्यवसाय में बदलने के अवसर उपलब्ध कराना है।

माँ नंदा-सुनंदा की आरती में शामिल हुए सीएम

महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माँ नंदा-सुनंदा की आरती में भी हिस्सा लिया और प्रदेशवासियों की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने महोत्सव के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए प्रदेशवासियों को नंदा-सुनंदा महोत्सव की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर देने, मातृशक्ति को सशक्त बनाने तथा प्रदेश की संस्कृति और विरासत को सुरक्षित रखते हुए विकास को आगे बढ़ाना है।

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