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भारत की अंतरिक्ष उड़ान को मिली नई ताकत, विक्रम-1 की सफलता पर भावुक हुआ सिंगापुर; PM मोदी ने दी बधाई

भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने शनिवार को नया इतिहास रच दिया। स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित विक्रम-1 रॉकेट ने अपने पहले ही ऑर्बिटल मिशन ‘मिशन आगमन’ में कई तकनीकी पेलोड को सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित कर दिया। इस उपलब्धि पर सिंगापुर के हाई कमिश्नर साइमन वोंग ने भारत की जमकर सराहना करते हुए कहा कि भारत ने “एक छोटे-से देश सिंगापुर को भी अपने साथ अंतरिक्ष और उससे आगे तक पहुंचाया है।”

सिंगापुर हाई कमिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साइमन वोंग का संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि विक्रम-1 की सफलता सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी बड़ी मिसाल है।

उन्होंने कहा,

“धन्यवाद ISRO, IN-SPACe और स्काईरूट। एक छोटे देश सिंगापुर को अपने साथ अंतरिक्ष और उससे आगे तक ले जाने के लिए आपका आभार। मैं इस समय बेहद भावुक हूं।”

वोंग ने स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक नागा भरत डाका से भी बातचीत कर पूरी टीम को बधाई दी।

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) से लॉन्च किए गए विक्रम-1 ने पहली ही कोशिश में अपने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। लॉन्च से पहले तकनीकी कारणों से थोड़ी देर की देरी हुई, लेकिन इसके बाद रॉकेट ने सभी चार चरणों में शानदार प्रदर्शन करते हुए निर्धारित कक्षा में अपने पेलोड स्थापित कर दिए।

इस सफलता के साथ स्काईरूट एयरोस्पेस दुनिया की उन चुनिंदा निजी कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने स्वयं विकसित ऑर्बिटल रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया है।

मिशन की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट की टीम से फोन पर बात कर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि पहली ही उड़ान में मिली यह सफलता भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र और आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए बड़ी उपलब्धि है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मिशन आगमन’ भविष्य में भी इसी तरह नई सफलताओं की ओर बढ़ता रहे।

पूरी तरह कार्बन-कंपोजिट सामग्री से बने विक्रम-1 की क्षमता लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 350 किलोग्राम तक का पेलोड पहुंचाने की है। इसमें स्काईरूट द्वारा विकसित हाई-परफॉर्मेंस सॉलिड मोटर और अत्याधुनिक 3डी प्रिंटेड इंजन का उपयोग किया गया है।

इस मिशन में ग्राहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डी-क्यूब्ड और स्काईरूट के स्वयं के तकनीकी प्रयोग भी भेजे गए।

विक्रम-1 अपने साथ कई भावनात्मक और ऐतिहासिक संदेश भी अंतरिक्ष में लेकर गया। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तलिखित ‘वंदे मातरम’ संदेश वाला पोस्टकार्ड, ISRO के वर्तमान और पूर्व अध्यक्षों, भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों, स्काईरूट कर्मचारियों, निवेशकों और दुनियाभर के समर्थकों के संदेश शामिल थे।

वर्ष 2018 में ISRO के पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका द्वारा स्थापित स्काईरूट एयरोस्पेस का लक्ष्य अंतरिक्ष तक पहुंच को सस्ता और अधिक सुलभ बनाना है।

इससे पहले वर्ष 2022 में कंपनी के विक्रम-एस रॉकेट ने भारत के पहले निजी तौर पर विकसित रॉकेट के रूप में इतिहास बनाया था। अब विक्रम-1 की सफलता भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग को नई मजबूती देने के साथ-साथ भविष्य में नियमित व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं का रास्ता भी खोलती है।

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