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कई उलझे मसलों पर भी राह दिखाएगा उत्तराखंड का यूसीसी कानून, सामाजिक ताने-बाने को करेगा मजबूत

उत्तराखंड में लागू होने वाला समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कई ऐसे विवादित मुद्दों पर भी अन्य राज्यों व केंद्र सरकार को राह दिखाएगा, जिस पर चर्चा तो बहुत होती है, लेकिन उन्हें विधि प्रविधानों से बांधा नहीं गया है। इसमें लड़कियों की विवाह की उम्र 18 से 21 वर्ष करने के साथ ही पैतृक संपत्ति में उनके अधिकार तक को शामिल किया गया है।

 

प्रस्तावित यूसीसी में विभिन्न समाजों में बहुविवाह व बच्चों को गोद लेने में आ रही अड़चनें जैसे मामले तो हैं ही, समलैंगिक विवाह तथा लिव इन रिलेशनशिप जैसे विवादित मुद्दे भी हैं।

 

 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा चुनाव के समय राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने का वादा किया था। इसके लिए विशेषज्ञ समिति गठित की थी, जिसे 30 जून तक कानून का मसौदा देना था। विशेषज्ञ समिति मसौदे को लगभग अंतिम रूप दे चुकी है और जल्द ही उसे राज्य सरकार को सौंपेगी। समिति अब तक 51 बैठकें कर चुकी है। नैनीताल व देहरादून के बाद बुधवार को तीसरा और अंतिम जन संवाद कार्यक्रम दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब में किया।

 

यह कानून सामाजिक ताने-बाने को करेगा मजबूत

समिति की अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना देसाई ने कहा कि यह ऐसा कानून होगा, जो सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करेगा। लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा और आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक असमानताओं से लड़ने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि हम ऐसा मसौदा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो हर किसी, हर धर्म के लोगों को पसंद आए। इसमें महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों के हितों की रक्षा पर प्राथमिक ध्यान देने के साथ विवाह, तलाक उत्तराधिकार, संरक्षकता, हिरासत और विरासत सहित कई मुद्दों के लिए एक संहिता लाने की सिफारिशें करेगा।

 

समलैंगिक लिव इन रिलेशनशिप में संपत्ति का अधिकार

इसे धार्मिक, राजनीतिक व सामाजिक नेताओं ने पसंद किया है। समिति की सदस्य दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि यूसीसी के मसौदे में जहां प्राचीन संस्कारों व परंपराओं का ख्याल रखा जाएगा, वहीं आने वाली पीढ़ी के समक्ष नए प्रकार के संबंधों की कानूनी चुनौतियों का भी रास्ता होगा। जिसमें लड़कियों की शादी की स्वीकार्य उम्र तय करना, समलैंगिक व लिव इन रिलेशनशिप में संपत्ति का अधिकार जैसे मुद्दे हैं। समिति के सदस्यों के अनुसार बच्चों के गोद लेने की प्रक्रिया कठिन है, उसके लिए भी आसान कानून बनाया जाएगा।

 

बुजुर्गों की अनदेखी जैसे मुद्दों को शामिल करने की उठी मांग

जन संवाद में दिल्ली में रह रहे उत्तराखंड मूल के शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व पत्रकारों ने इन ज्वलंत मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। आश्रित बुजुर्गों के देखभाल में अनदेखी जैसे मुद्दों को भी यूसीसी में जगह देने की मांग की। आग्रह किया कि विवाह में पारंपरिक रीति रिवाजों का ख्याल रखा जाए। सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह ने आश्वस्त किया कि यूसीसी से परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं होगा, बल्कि संरक्षित किया जाएगा। समिति के सदस्य न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली व मनु गौड ने लोगों की आशंकाएं दूर कीं।

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