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भाजपा सत्ता में बने रहता चाहती है और कांग्रेस भी सत्ता के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी

सत्तारूढ़ भाजपा व कांग्रेस में टिकटों की टिकटिक जारी है। भाजपा सत्ता में बने रहता चाहती है और कांग्रेस भी सत्ता के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी है। इसके लिए राजनीतिक दलों को जिताऊ प्रत्याशी की तलाश है। भाजपा ने चार तरह के सर्वे कराने के साथ ही रायशुमारी भी कर ली है। माना जा रहा हे कि इसके साथ ही हाईकमान की पसंद भी प्रत्याशी चयन का आधार बनेगी।वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में 57 सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी विजय रथ को यूं ही बरकरार रखना चाहती है। सत्ता विरोधी लहर समेत तमाम फैक्टर होते हैं, जिनके लिए अलग स्तर से काम करना होता है। ऐसे में सही प्रत्याशी का चयन करना चुनौती से कम नहीं है। वैसे भी भाजपा के 54 सीटिंग विधायक हैं। इन सभी विधायकों की प्रबल रूप से दावेदारी है।

इसके अलावा तमाम ऐसे सक्रिय नेता हैं, जिनकी क्षेत्र में मजबूत पकड़ है। इनकी भी दावेदारी है। ऐसे में पार्टी अलग-अलग स्तर पर जिताऊ प्रत्याशी के चयन के लिए चार तरह के सर्वे करा चुकी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार पहला सर्वे प्रशासनिक आधार पर किया गया है। दूसरा सर्वे राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ नेताओं ने अपनी ओर से करवाया है। तीसरा सर्वे इंटेलीजेंस का है और चौथा सर्वे आरएसएस का है। इसके अलावा पार्टी ने पर्यवेक्षकों के जरिये 70 विधानसभा क्षेत्रों में पदाधिकारियों से रायशुमारी करने के साथ ही गुप्त तरीके से मतदान भी करवाया है।नैनीताल जिले के पर्यवेक्षक राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल ने कहा कि पार्टी में टिकट का कोई एक आधार नहीं होता है। चार सर्वे, रायशुमारी के अलावा पार्टी हाईकमान की रिपोर्ट के आधार पर ही संसदीय बोर्ड प्रत्याशी के नाम की घोषणा करता है। इधर, इस सबके बावजूद दावेदार अपने-अपने स्तर पर टिकट पाने की जोर आजमाइश में लगे हैं। फिलहाल दिल्ली में 16 जनवरी को पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक पर दावेदारों से लेकर कार्यकर्ताओं की निगाहें लगी रहेंगी।

 

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