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होली में सिंथेटिक रंगों के बजाय प्राकृतिक रंगों का करें इस्तेमाल ; प्रकृति के संग मनाएं होली का त्योहार

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स्पैक्स संस्था ने छात्र-छात्राओं को बताया कि होली कैसे खेलें और इस दौरान किन बातों का ख्याल रखें। इसके लिए संस्था ने विभिन्न स्कूलों में कार्यशाला का आयोजन किया। जिसमें छात्रों और शिक्षकों को सिंथेटिक रंगों से होली न खेलने की सलाह दी गई। साथ ही प्राकृतिक तत्वों से रंग बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। छात्रों और शिक्षकों के लिए अलग-अलग कार्यशाला का आयोजन किया गया।

स्पैक्स के सदस्यों ने इस बार 26 फरवरी से चार मार्च तक दून के विभिन्न स्कूलों में जाकर छात्र-छात्राओं को सुरक्षित होली मनाने का संदेश दिया। इसके तहत छात्रों और शिक्षकों को होली में सिंथेटिक रंगों के बजाय प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। बाजार में बिकने वाले सिंथेटिक रंगों के नुकसान के बारे में बताने के साथ ही त्योहार के दौरान स्वास्थ्य का भी ख्याल रखने को कहा। फल, फूल और सब्जियों से सूखे व पानी के रंग बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।

स्पैक्स के सचिव डॉ. बृजमोहन शर्मा ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय डोभालवाला, सोफिया हाईस्कूल, विवरली पब्लिक स्कूल, राप्रावि इंदिरा कॉलोनी समेत नौ स्कूलों के 45 शिक्षकों के साथ तमाम छात्र-छात्राओं ने कार्यशालाओं में भाग लिया। छात्र-छात्राओं को हल्दी, चंदन, मेहंदी, नील, रोली, आराकोट से रंग बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इस मौके पर राहुल मौर्य, नीरज उनियाल, डॉ. विमला सिंह, डॉ. बीके नेगी, डॉ. पुनीत, पूजा पोखरियाल आदि मौजूद रहे।

रंग को खरीदते वक्त ध्यान दे कि रंग में से किसी तरह के केमिकल तो नहीं है। रंग खरीदने के दौरान आप थोड़ा सा रंग लेकर पानी उसे पानी में घोल कर देखकर चेक करलें। यदि रंग पानी में नहीं घुलता तो इसका मतलब है कि उसमें केमिकल मिलाया गया है। रंग खरीदते वक्त देखें कि उसमें चमकदार कण तो नहीं है, क्योंकि नेचुरल रंग में चमक नहीं होती साथ ही यह डार्क शेड में नहीं मिलते। आप घर में ही आसानी से नेचुरल रंग बना सकते हैं। इसके लिए बेसन और हल्दी को मिलाकर पीला रंग तैयार कर सकते हैं। यह आपकी स्किन के लिए भी अच्छा होगा। गुड़हल के फूलों के सूखे पत्तों के पाउडर को आटे के साथ मिला कर लाल रंग तैयार करें। 

घर पर ही प्राकृतिक रंगों को हल्दी, चंदन, फूलों और सब्जियों की मदद से तैयार किया जा सकता है। लाल रंग के लिए लालरंग के चंदन से और अनार के छिलके को उबालकर तैयार किया जा सकता है। नीला रंग चुकंदर की जड़ से तैयार किया जा सकता है। वहीं, पीला रंग हल्दी को चावल या आटे में मिलाकर तैयार किया जा सकता है, जबकि गेंदे के फूल से भी रंग तैयार किया जा सकता है। हरा रंग तैयार करने के लिए पालक, हरा धनिया और हरी गेहूं को पीस कर मेहंदी को आटे में मिलाकर तैयार किया जा सकता है। बुरांस के फूलों को रातभर पानी में भिगो कर भी लाल रंग बनाया जा सकता है, लेकिन यह फूल सिर्फ पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है। 

होली के दौरान इस बार भी हुड़दंगियों की जमकर खैरियत ली जाएगी। जोश व उमंग में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडऩे वाले सलाखों के पीछे होंगे। हर कोई अनुशासन के दायरे में रह कर त्योहार मनाएगा। अशांति फैलाने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। होली को लेकर एसपी सिटी श्वेता चौबे ने गुरुवार को थानेदारों के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने होलिका के आसपास पुलिस की तैनाती के साथ होली के जुलूस की वीडियोग्राफी कराने का निर्देश दिया।

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