तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के उस बयान को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें युद्ध जल्द खत्म होने की बात कही गई थी। ईरान की सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने स्पष्ट कहा है कि युद्ध कब और कैसे समाप्त होगा, इसका फैसला केवल ईरान करेगा, अमेरिका नहीं।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में कहा था कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान ज्यादा लंबा नहीं चलेगा और यह एक “छोटी अवधि का अभियान” है। लेकिन IRGC ने इस बयान को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
IRGC के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि “हम तय करेंगे कि यह जंग कब खत्म होगी। क्षेत्र का भविष्य और समीकरण अब हमारी सशस्त्र सेनाओं के हाथ में हैं, अमेरिकी सेनाएं युद्ध खत्म नहीं करेंगी।” उन्होंने ट्रंप पर “चालाकी और धोखे” का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका को युद्ध में “शर्मनाक हार” का सामना करना पड़ा है।
ईरान ने यह भी दावा किया कि उसके हमलों के बाद अमेरिकी जहाज और लड़ाकू विमान क्षेत्र से काफी दूर चले गए हैं। IRGC ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना के सैनिक ईरानी हमलों से बचने के लिए 1000 किलोमीटर से अधिक दूरी पर चले गए।
ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln (CVN-72) पर मिसाइल दागे जाने के बाद अमेरिकी सैनिक और दूर हट गए। साथ ही IRGC ने कहा कि उसके मिसाइल भंडार में कोई कमी नहीं आई है और उसके हथियार पहले से ज्यादा ताकतवर हैं।
IRGC ने कहा कि उसके कुछ मिसाइल वारहेड का वजन एक टन से अधिक है और यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो वह दुश्मन देशों को क्षेत्र से “एक लीटर तेल भी निर्यात नहीं करने देगा।”
यह बयान ट्रंप की हालिया चेतावनी के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर ईरान Strait of Hormuz में तेल की आवाजाही रोकता है, तो अमेरिका ईरान पर पहले से “20 गुना ज्यादा ताकत से हमला करेगा।”
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि अमेरिका ऐसे लक्ष्यों को निशाना बनाएगा जो “आसानी से नष्ट किए जा सकते हैं”, ताकि ईरान दोबारा मजबूत न बन सके।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। अनुमान है कि दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है।
यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब Mojtaba Khamenei को अपने पिता Ali Khamenei की जगह ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अली खामेनेई की मौत अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान हुई थी।
नए नेतृत्व के आने के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें 2022 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थीं। हालांकि बाद में अमेरिका द्वारा कई देशों पर लगाए गए कुछ प्रतिबंध हटाने के बाद कीमतों में थोड़ी नरमी देखी गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।
