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टैक्स माफी से जनता को राहत मिली; लेकिन निकायों की आय कम होने से आर्थिक संकट बढ़ा

तीन साल पहले नगर निकायों में शामिल क्षेत्र को शासन ने दस साल तक टैक्स के दायरे से बाहर रखा है। टैक्स माफी से जनता को राहत मिली है, लेकिन निकायों की आय कम होने से आर्थिक संकट बढ़ गया है। कई निकायों के लिए वार्डों में सुविधाएं देना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में टैक्स की भरपाई के लिए निकाय शहरी विकास निदेशालय से प्रतिपूर्ति की मांग कर रहे हैं।

हल्द्वानी ब्लॉक के 36 गांवों को 2018 में हुए निकाय चुनाव से पहले नगर निगम में शामिल कर लिया गया। तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दस साल तक घरेलू आवासों को भवन व स्वच्छता कर से छूट देने का ऐलान किया। बाद में तीरथ सिंह रावत के कार्यभार संभालने के बाद व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी छूट में शामिल कर लिया गया। हल्द्वानी निगम ने नव सम्मिलित क्षेत्र से प्राप्त होने वाले टैक्स के एवज में शासन ने सालाना तीन करोड़ की प्रतिपूर्ति मांगी है।

नव सम्मिलित क्षेत्र में 5500 व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। इसमें कई माल, अस्पताल, स्कूल, होटल आदि शामिल हैं। कारपेट क्षेत्र के आधार पर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से डेढ़ करोड़ व इतना ही घरेलू उपभोक्ताओं से हाउस टैक्स बनता है। नगर आयुक्त हल्द्वानी सीएस मर्तोलिया ने बताया कि नए वार्डों से प्राप्त होने वाले टैक्स का ब्यौरा बनाकर प्रतिपूर्ति के लिए शहरी विकास निदेशालय को भेजा है। इस राशि से वार्डों में सुविधाएं जुटाने में मदद मिलेगी।

 

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