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Jeffrey Epstein प्रकरण: पीड़िता रीना ओह ने सुनाई आपबीती, पूरी पारदर्शिता की मांग

अमेरिकी वित्तीय कारोबारी और दोषी यौन अपराधी Jeffrey Epstein से जुड़े मामलों में एक और पीड़िता सामने आई हैं। रीना ओह नाम की महिला ने दावा किया है कि 1990 के दशक के अंत में, जब वह 21 वर्ष की थीं और आर्ट की पढ़ाई कर रही थीं, तब एपस्टीन ने उन्हें कथित रूप से स्कॉलरशिप का लालच देकर अपने संपर्क में लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एपस्टीन ने उन्हें बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स की पढ़ाई के लिए बिना शर्त स्कॉलरशिप देने का प्रस्ताव दिया था और कहा था कि उन्हें दोबारा मिलने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, रीना का आरोप है कि बाद में एपस्टीन बार-बार मिलने का दबाव बनाने लगा। मना करने पर कथित तौर पर स्कॉलरशिप वापस ले ली गई।

रीना के मुताबिक, वह फ्लोरिडा स्थित एपस्टीन एस्टेट भी गईं, जहां उन्होंने खुद को असुरक्षित और डरा हुआ महसूस किया। उन्होंने दावा किया कि वहां एक तय “प्रोटोकॉल” था और अधिकांश लोगों को मसाज रूम में ले जाया जाता था। रीना का कहना है कि एपस्टीन का व्यवहार और बातचीत उन्हें संदिग्ध लगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एपस्टीन ने उन्हें चुप रहने के लिए धमकाया।

रीना का कहना है कि यह केवल शारीरिक नियंत्रण का मामला नहीं था, बल्कि मानसिक और भावनात्मक दबाव भी डाला गया, जिससे उबरने में वर्षों लग जाते हैं।

रीना ने कहा कि एपस्टीन से जुड़े मामलों में जिन प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए हैं, उनसे पूछताछ होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि सभी संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और पूरी पारदर्शिता बरती जाए।

एपस्टीन को 2019 में गिरफ्तार किया गया था और उसी वर्ष न्यूयॉर्क की जेल में उनकी मौत हो गई थी, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया। हालांकि, इस मामले को लेकर अब भी कई सवाल और साजिश संबंधी दावे चर्चा में रहते हैं।

रीना ने 2019 में अपनी पहचान सार्वजनिक करने का फैसला किया ताकि अन्य पीड़ितों को आगे आने के लिए प्रेरित किया जा सके। उनका कहना है कि ऐसा करने से उनकी निजी जिंदगी प्रभावित हुई, लेकिन न्याय की लड़ाई के लिए यह जरूरी था।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावशाली और धनाढ्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई में अक्सर देरी होती है और कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल जवाबदेही से बचने के लिए किया जाता है। रीना के अनुसार, जब तक मामले से जुड़े सभी तथ्यों और नामों को सार्वजनिक नहीं किया जाता, तब तक पीड़ितों को पूर्ण न्याय नहीं मिल पाएगा।

यह मामला एक बार फिर सत्ता, प्रभाव और कानून के दायरे में जवाबदेही को लेकर वैश्विक बहस को तेज कर रहा है।

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