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10 जून को उत्तराखंड से रिक्त हो रही राज्यसभा की एक सीट का होगा चुनाव

 ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में सात जून से होने वाला विधानसभा का बजट सत्र आगे खिसक सकता है। इन दिनों चल रही चारधाम यात्रा और 10 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के दृष्टिगत इस संबंध में मंथन चल रहा है। यह भी संभव है कि सत्र गैरसैंण की बजाए देहरादून में ही आयोजित किया जाए।सरकार ने गैरसैंण में बजट सत्र के लिए सात से 14 जून की अवधि तय करते हुए हाल में विधानसभा सचिवालय को इस संबंध में पत्र भेजा था। इसे देखते हुए विधानसभा सचिवालय ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं, लेकिन इन दिनों चारधाम यात्रा चल रही है। पुलिस व प्रशासनिक अमला इसमें जुटा हुआ है। ऐसे में आवागमन में दिक्कत की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।10 जून को उत्तराखंड से रिक्त हो रही राज्यसभा की एक सीट का चुनाव होना है। विधानसभा में भाजपा के पास दो-तिहाई बहुमत होने के चलते उसकी जीत तय है, लेकिन सात जून से बजट सत्र शुरू होने की दशा में विधानसभा अध्यक्ष व सचिव को 10 जून को देहरादून आना होगा। असल में इस चुनाव की पूरी प्रक्रिया देहरादून स्थित विधानसभा भवन में ही होनी है। पूर्व में इसकी अधिसूचना जारी हो चुकी है।

साथ ही, यदि विपक्ष ने अपना प्रत्याशी मैदान में उतार दिया तो मतदान होना तय है। इस परिस्थिति में सभी विधायकों को 10 जून को देहरादून पहुंचना होगा। इन सब परिस्थितियों को देखते हुए बजट सत्र की तिथि आगे खिसकने की संभावना जताई जा रही है। संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के अनुसार सभी पहलुओं को ध्यान में तिथि आगे बढ़ाने समेत अन्य विकल्पों को लेकर विचार चल रहा है।लक्सर से बहुजन समाज पार्टी के विधायक मोहम्मद शहजाद ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर विधानसभा का बजट सत्र गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानभवन के स्थान पर देहरादून में आयोजित करने की मांग उठाई है। उन्होंने चारधाम यात्रा और बरसात के दृष्टिगत सत्र देहरादून में कराने की पैरवी की है।

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बसपा विधायक ने कहा है कि सात जून से गैरसैंण में सत्र कराना व्यवहारिक दृष्टि से उचित नहीं है। बरसात शुरू होने वाली है। इसके अलावा चारधाम यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। इससे यात्रा मार्ग पर यातायात प्रभावित होगा।पूर्व में देखा गया है कि अधिकांश कार्मिकों को गैरसैंण व भराड़ीसैंण में जगह नहीं मिल पाती। वे गौचर अथवा कर्णप्रयाग में ठहरते हैं। यात्रा सीजन में अभी श्रद्धालुओं को ही कमरे मिलने में कठिनाई हो रही है तो सरकारी कर्मचारियों को कमरे कैसे मिलेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय यह है कि अभी सरकार को पूरा ध्यान चारधाम यात्रा पर लगाना चाहिए। ऐसे में सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

 

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