लोकसभा में सोमवार को देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त कराने के मुद्दे पर नियम 193 के तहत महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार की नक्सल विरोधी नीति पर विस्तृत बयान दिया और विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
अपने संबोधन में अमित शाह ने ऐलान किया कि देश अब नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र को चुनौती देने वाले नक्सलियों के दिन अब समाप्त हो गए हैं और सरकार ने इस दिशा में निर्णायक सफलता हासिल की है।
गृह मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह कई बार नक्सल समर्थकों के साथ मंच साझा करते हुए देखे गए हैं। शाह ने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी ने नक्सली गतिविधियों से जुड़े कुछ मामलों में समर्थन जताया और ऐसे प्रदर्शनों से जुड़े वीडियो भी साझा किए।
इसके साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय की सरकार नक्सलियों के प्रति नरम रुख अपनाए हुए थी।
नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की नीति स्पष्ट करते हुए अमित शाह ने कहा,
“हमारी सरकार की नीति साफ है—बातचीत सिर्फ उन्हीं से होगी जो हथियार डालेंगे। जो गोली चलाएंगे, उन्हें गोली से ही जवाब दिया जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां संविधान सर्वोपरि है। सरकार किसी भी प्रकार की हिंसा या धमकी से डरने वाली नहीं है और सभी नागरिकों के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में विभिन्न राज्यों में नक्सलियों के आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
