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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी धनतेरस मंगलवार को मनाया जाएगा

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी धनतेरस मंगलवार को मनाया जाएगा। इसके लिए विशेष रूप से बर्तन और ज्वेलरी बाजार पूरी तरह सज चुका है। दुकानदारों ने ग्राहकों की सहूलियत को देखते हुए गिफ्ट बाक्स तैयार किए हैं। आम से लेकर खास वर्ग का ध्यान रखते हुए गिफ्ट पैक तैयार किए गए हैं।धनतेरस पर भगवान कुबेर और आयुर्वेद के प्रणेता भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ बर्तन आदि खरीदने का खास महत्व है। धनतेरस के दिन विशेष रूप से वाहन, घर, सोना, चांदी, बर्तन, कपड़े, धनिया, झाडू खरीदने का महत्व है। मान्यता है कि इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, जमीन की खरीदने से इनमें बढ़ोतरी होती है। बाजार में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए आफर के विकल्प भी रखे हैं।ज्वेलरी बाजार की बात करें तो पांच ग्राम से अधिक के सिक्के बाजार में बाक्स में उपलब्ध हैं। 50 ग्राम से लेकर तीन किलो तक चांदी की मूर्तियां भी ज्वेलर्स ने तैयार की है। अधिकांश ज्वेलर्स प्रत्येक खरीदारी पर एक उपहार दे रहे हैं। ज्वेलरी के मेकिंग चार्ज पर भी छूट दी जा रही है।

धनरतेरस के लिए बर्तन बाजार से लेकर ज्वेलरी बाजार में लोग ने एडवांस बुकिंग की हुई है। इनमें सबसे ज्यादा थाली, कटोरी, गिलास, घंटी, दीये, चांदी की मूर्ति, सिक्के खरीदना इस दिन पसंद कर रहे हैं। इसी तरह सैंपल ज्वेलरी, गढ़वाली नथ, गुलोबंद, चांदी के सिक्के, मूर्तियां, सिंहासन, पूजा थाल की बुकिंग खूब हो रही है।ज्वेलर्स ने इस बार ग्राहकों के लिए एम्ब्रोड ब्रांड की लक्ष्मी, गणेश, हनुमान चांदी की मूर्तियां तैयार की है।राजपुर रोड व पलटन बाजार स्थित फ्रंटियर ज्वेलर्स के स्वामी अंशुमन का कहना है कि बीते वर्ष कोरोनाकाल में कारोबार बंद था, लेकिन इस बार कोविड गाइडलाइन के तहत मिली छूट के चलते ग्राहक खरीदारी को लेकर उत्साहित हैं। त्योहारी सीजन में कारोबार बढ़ा है। जो लोग बाजार नहीं आ सकते उन्हें इंटरनेट मीडिया के माध्यम से सैंपल उपलब्ध कराए जा रहे हैं, इसके बाद पसंद आने पर बुकिंग की जा रही है।धनतेरस के दिन घर, वाहन, संपत्ति, सोना, चांदी, बर्तन, कपड़े, धनिया, झाडू खरीदने का महत्व है। इस बार खरीदारी का मूहूर्त मंगलवार शाम 6:18 से रात 8:11 बजे तक रहेगा। यह समय पूजा के लिए भी शुभ है।धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए उनकी तस्वीर पूर्व में स्थापित करें। इस दौरान भगवान कुबेर का जाप करें। हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन कर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें। तस्वीर पर रोली, अक्षत, पुष्प, जल, दक्षिणा, वस्त्र, कालवा, धूप और दीप अर्पित करें।

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