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तिब्बत में 7.0 तीव्रता के भूकंप से तबाही, 18 लोगों की मौत; पाकिस्तान, चीन और अफगानिस्तान में भी कांपी धरती

Earthquake News: तिब्बत में गुरुवार को आए 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। कई मकान ढह गए हैं और सड़कों को भी नुकसान पहुंचा है। इस बीच शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 की सुबह पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए।

तीन देशों में सुबह-सुबह भूकंप के झटके

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, शुक्रवार सुबह तीनों देशों में अलग-अलग समय पर भूकंप आए। अफगानिस्तान में सुबह 5:54 बजे 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। पाकिस्तान में सुबह 4:56 बजे 4.9 तीव्रता के झटके महसूस किए गए, जबकि चीन में सुबह 6:05 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। इन भूकंपों से हुए नुकसान को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

तिब्बत में भूकंप से भारी नुकसान

गुरुवार को तिब्बत में आए 7.0 तीव्रता के भूकंप से कई इलाकों में इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है और 46 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 11 घायलों की हालत गंभीर बताई गई है। भूकंप के कारण 339 मकान ढह गए या क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र नाग्कू से लगभग 190 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में एक पहाड़ी क्षेत्र में था। इसका असर क्षेत्रीय राजधानी ल्हासा के आसपास के इलाकों में भी महसूस किया गया।

संचार व्यवस्था प्रभावित, सड़क बंद

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, भूकंप के कारण कुछ क्षेत्रों में संचार व्यवस्था बाधित हुई है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्र से गुजरने वाली ट्रेनों को रोकने के लिए भी आपात कदम उठाए गए। वहीं, चट्टानें खिसकने के कारण नेशनल हाईवे 317 का एक हिस्सा बंद करना पड़ा।

भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के बीच मौसम भी चुनौती बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले तीन दिनों तक कुछ इलाकों में रुक-रुककर बर्फबारी होने की संभावना है। इससे बचाव अभियान और प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने में परेशानी आ सकती है।

फिलहाल तिब्बत में भूकंप से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा और राहत कार्यों पर ध्यान दिया जा रहा है।

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