आंध्र प्रदेश में कथित शराब घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ा सुराग मिला है। एजेंसी ने जांच में 1048.45 करोड़ रुपये की रिश्वत के मनी ट्रेल का पता लगाया है। यह रकम कथित तौर पर राज्य में सक्रिय शराब सिंडिकेट द्वारा विभिन्न डिस्टिलरी से वसूली गई थी।
जांच के दौरान ईडी की टीम ने कई स्थानों पर छापेमारी की और संदिग्ध लोगों से पूछताछ की। जांच में सामने आया है कि कुछ डिस्टिलरी को ऑपरेशनल कंट्रोल के जरिए रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया। आरोप है कि रिश्वत नकद, सोने और अन्य माध्यमों से ली गई। इसके अलावा शराब के परिवहन से भी सिंडिकेट को वित्तीय लाभ हुआ।
ईडी के अनुसार, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही जांच में पाया गया कि अवैध कमाई का इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने और सिंडिकेट से जुड़े लोगों की निजी कमाई बढ़ाने में किया गया। एजेंसी को शक है कि इस अवैध कमाई का एक बड़ा हिस्सा आरोपियों ने छिपा दिया या खर्च कर दिया।
ईडी ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 441 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क की हैं। ये संपत्तियां आंध्र प्रदेश शराब घोटाले से जुड़े विभिन्न आरोपियों की बताई जा रही हैं। यह घोटाला राज्य में पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान हुआ बताया जा रहा है।
कुर्क की गई संपत्तियों में मुख्य आरोपी केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी संस्थाओं की संपत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा अन्य आरोपियों जैसे बूनेटी चाणक्य और उनसे जुड़ी संस्थाओं व रिश्तेदारों, तथा डोंथिरेड्डी वासुदेव रेड्डी से संबंधित संपत्तियां भी जब्त की गई हैं।
इनमें बैंक जमा, सावधि जमा (FD), भूखंड और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं।
ईडी के बयान के अनुसार, 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद नवगठित राज्य सरकार ने Andhra Pradesh State Beverages Corporation Limited (APSBCL) के जरिए सरकारी खुदरा शराब दुकानों (GRO) के माध्यम से शराब की बिक्री पर एकाधिकार स्थापित कर लिया था।
एजेंसी का आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर शराब सिंडिकेट ने डिस्टिलरी से भारी रिश्वत वसूली और अवैध कमाई का नेटवर्क खड़ा किया।
फिलहाल ईडी इस मामले में मनी ट्रेल, वित्तीय लेनदेन और सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
