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सफेद तिल के नियमित सेवन से सेहत को मिल सकते हैं कई लाभ

भारतीय रसोई में सदियों से इस्तेमाल होने वाला सफेद तिल अब आधुनिक पोषण विज्ञान की नजर में भी खास महत्व रखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में रोजाना सफेद तिल का सेवन हड्डियों, हृदय और पाचन तंत्र के लिए लाभकारी हो सकता है।

पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि सफेद तिल कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस का अच्छा स्रोत है। ये तत्व हड्डियों की घनत्व (Bone Density) बनाए रखने में सहायक होते हैं। हालांकि, कैल्शियम का बेहतर अवशोषण विटामिन D के स्तर पर भी निर्भर करता है।

तिल में पाए जाने वाले प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट—सेसमिन और सेसमोलिन—कोलेस्ट्रॉल संतुलन में मदद कर सकते हैं। कुछ अध्ययनों में इनके हल्के रक्तचाप-नियंत्रक प्रभाव भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ इसका लाभ अधिक प्रभावी होता है।

सफेद तिल में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो कब्ज की समस्या में राहत दिलाने में सहायक हो सकता है। सुबह सीमित मात्रा में सेवन करने से आंतों की गतिशीलता बेहतर हो सकती है।

तिल में मौजूद जिंक और विटामिन E त्वचा की मरम्मत और बालों की जड़ों को मजबूत करने में भूमिका निभाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को फ्री-रेडिकल क्षति से बचाने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि तिल पोषक तत्वों से भरपूर है, लेकिन इसकी तासीर गर्म मानी जाती है। गर्मियों में 1 चम्मच प्रतिदिन पर्याप्त माना जाता है। जिन लोगों को तिल से एलर्जी, किडनी स्टोन या अन्य चिकित्सीय समस्याएं हैं, वे डॉक्टर की सलाह के बाद ही सेवन करें।

विशेषज्ञ सुबह 1 चम्मच तिल अच्छी तरह चबाकर खाने या रातभर भिगोकर सेवन करने की सलाह देते हैं। इसे सलाद, दही या चटनी में मिलाकर भी खाया जा सकता है।

सफेद तिल कोई चमत्कारी उपाय नहीं, लेकिन संतुलित मात्रा में नियमित सेवन स्वास्थ्य को कई स्तरों पर सहयोग दे सकता है।

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