हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का 70 के दशक में जबरदस्त जलवा था। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि फैंस—खासकर लड़कियां—उनकी एक झलक पाने के लिए दीवानी रहती थीं। लेकिन इसी दौर में फिल्म इंडस्ट्री में एक और अभिनेता की एंट्री हुई, जिनकी पर्सनैलिटी और स्क्रीन प्रेज़ेंस ने लोगों को इतना प्रभावित किया कि उनकी तुलना खुद राजेश खन्ना से होने लगी। ये अभिनेता थे विजय अरोड़ा।
विजय अरोड़ा ने 1971 में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से पढ़ाई पूरी करने के बाद 1972 में फिल्म ‘जरूरत’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इस फिल्म में उनके साथ रीना रॉय नजर आई थीं। हालांकि शुरुआती पहचान उन्हें फिल्म ‘यादों की बारात’ (1973) से मिली, जिसमें जीनत अमान के साथ उनका रोमांटिक अंदाज़ दर्शकों को खूब पसंद आया। इसी फिल्म का गाना ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ आज भी सदाबहार गीतों में गिना जाता है।
लंबी कद-काठी, आकर्षक व्यक्तित्व और चॉकलेटी लुक्स ने विजय अरोड़ा को जल्द ही युवाओं का पसंदीदा बना दिया।
विजय अरोड़ा की बढ़ती लोकप्रियता ने फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी। उनकी तुलना सीधे राजेश खन्ना से होने लगी। दोनों की शख्सियत और स्क्रीन इमेज में समानता देख कई लोग विजय अरोड़ा को “दूसरा राजेश खन्ना” कहने लगे थे। कहा जाता है कि खुद राजेश खन्ना ने भी एक बार माना था कि अगर कोई उनकी जगह ले सकता है, तो वह विजय अरोड़ा हैं।
दोनों सितारों ने साथ में ‘सौतन’, ‘रोटी’ और ‘निशान’ जैसी फिल्मों में काम किया, जिन्हें दर्शकों ने सराहा।
विजय अरोड़ा सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और कई टीवी धारावाहिकों में भी नजर आए। उनका सबसे यादगार टीवी किरदार रामानंद सागर के मशहूर धारावाहिक ‘रामायण’ में था, जहां उन्होंने मेघनाद (इंद्रजीत) का किरदार निभाया। इस भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।
हालांकि विजय अरोड़ा ने लंबा और विविधतापूर्ण करियर जिया, लेकिन उन्हें वह ऊंचाई नहीं मिल पाई जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि इंडस्ट्री की राजनीति के कारण वे अपने समकालीन कलाकारों से पीछे रह गए।
फिर भी, 70 के दशक के सिनेमा प्रेमियों के लिए विजय अरोड़ा आज भी उस दौर की रोमांटिक छवि और मासूमियत का अहम चेहरा हैं—एक ऐसा सितारा, जिसने अपने समय में सुपरस्टार राजेश खन्ना को भी कड़ी टक्कर दी थी।

