onwin giriş
Home उत्तराखंड

उत्तरकाशी में अनोखी ‘भस्म होली’, काशी विश्वनाथ मंदिर में गूंजे शिवभक्ति के रंग

सीमांत जनपद उत्तरकाशी में रंगभरी होली से पहले एक अनूठी परंपरा निभाई जाती है। यहां स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर, उत्तरकाशी में सोमवार को श्रद्धालुओं ने भस्म की होली खेली। इस दौरान भगवान शिव के भक्त एक-दूसरे को भस्म लगाकर नाचते-झूमते नजर आए।

मंदिर परिसर में यह आयोजन पिछले करीब 10 वर्षों से लगातार किया जा रहा है। वर्षभर मंदिर में होने वाले यज्ञों की भस्म को श्रद्धालु एक-दूसरे को लगाते हैं और प्रसाद के रूप में अपने घर भी ले जाते हैं।

सुबह की आरती के बाद सबसे पहले स्वयंभू शिवलिंग पर हवन कुंड और धूनी की भस्म अर्पित कर आशीर्वाद लिया गया। इसके बाद स्वस्ति वाचन के साथ मंदिर के महंत ने हवा में भस्म उड़ाकर भस्म होली की शुरुआत की। यह आयोजन महाकाल मंदिर, उज्जैन की तर्ज पर किया जाता है।

भस्म होली के दौरान स्थानीय लोग ‘रासो तांदी’ नृत्य पर जमकर थिरके। ढोल-नगाड़ों और शिव भजनों के बीच श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को भस्म लगाकर होली का आनंद लिया। मंदिर परिसर पूरी तरह शिवमय हो उठा।

मंदिर के महंत अजय पुरी के अनुसार, पारंपरिक त्योहारों के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से यह परंपरा शुरू की गई थी। उन्होंने बताया कि सालभर लोग अपने दुख-दर्द दूर करने के लिए यज्ञ में आहुति देते हैं और उसी की राख को भगवान का प्रसाद मानकर भस्म होली खेली जाती है।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्राकृतिक होली को बढ़ावा देता है। आजकल रासायनिक रंगों से त्वचा को नुकसान होता है, जबकि यज्ञ की भस्म और भभूत पूरी तरह प्राकृतिक होती है।

मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी। कहा जाता है कि उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना कर अपना क्रोध शांत किया था। इसी कारण इस धाम को ‘शौम्य काशी’ भी कहा जाता है।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर भगवान शिव हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि सालभर मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रहती है।

Similar Posts

© 2015 News Way· All Rights Reserved.