नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट पेश किए जाने से पहले ही देश की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने जहां सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं, वहीं केंद्रीय मंत्रियों ने बजट को भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने बजट से पहले ही अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें इस बजट से कोई उम्मीद नहीं है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजट को “सुधार नहीं, विकृत बजट” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट देश की केवल 5 प्रतिशत आबादी के हित में होगा और भाजपा अपने समर्थक वर्ग को लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
सपा सांसद रामगोपाल यादव ने भी कहा कि उन्हें इस बजट से कोई विशेष उम्मीद नहीं है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की ढांचागत चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से कई बुनियादी आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। उनके अनुसार निजी क्षेत्र का निवेश अपेक्षित स्तर तक नहीं बढ़ा है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में भी गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वित्त मंत्री अर्थव्यवस्था में मौजूद असमानताओं को स्वीकार कर ठोस समाधान पेश करेंगी।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सरकार को उसके पुराने वादों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, इसलिए अब तक 24 करोड़ नौकरियों का विवरण सामने आना चाहिए। उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने, काला धन वापस लाने और महंगाई पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए। संजय सिंह ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की ठोस योजना बजट में दिखनी चाहिए।
विपक्ष के आरोपों के बीच सरकार के मंत्रियों ने भरोसा जताया है कि यह बजट देश को नई दिशा देगा। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पिछले 11 वर्षों से सरकार का लक्ष्य भारत को विकसित राष्ट्र बनाना रहा है और हर बजट उसी दिशा में एक कदम रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह बजट भी विकास की रफ्तार को तेज करेगा।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे “ऐतिहासिक बजट” करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की सुधार नीति देश को विकसित भारत की ओर तेजी से आगे बढ़ा रही है। वहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे “विकसित और आत्मनिर्भर भारत का बजट” बताया।
बजट से पहले आए इन बयानों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। विपक्ष रोजगार, महंगाई, निवेश और किसानों के मुद्दों पर जवाब चाहता है, जबकि सरकार विकास, सुधार और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता बता रही है। अब देश की नजरें वित्त मंत्री के बजट भाषण पर टिकी हैं, जिससे साफ होगा कि आम जनता को क्या राहत मिलती है और सरकार आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए क्या रोडमैप पेश करती है।

