भारत के पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। पूर्वी नेपाल के ताप्लेजुंग जिले में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 मापी गई है। भूकंप के झटके आसपास के शंखुवासभा और पांचथर जिलों में भी महसूस किए गए, जिससे लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई।
नेशनल अर्थक्वेक मॉनिटरिंग एंड रिसर्च सेंटर के अनुसार, भूकंप सुबह 6 बजकर 13 मिनट पर आया। इसका केंद्र ताप्लेजुंग जिले के फलाइचा क्षेत्र में स्थित था, जो राजधानी काठमांडू से लगभग 420 किलोमीटर पूर्व में है। राहत की बात यह रही कि भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की तत्काल कोई सूचना नहीं मिली है।
गौरतलब है कि इससे पहले 9 दिसंबर को भी नेपाल के चीन सीमा से सटे कालापानी क्षेत्र में 4.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। नेपाल भूकंप की दृष्टि से दुनिया के सबसे संवेदनशील देशों में से एक माना जाता है। देश हिमालय पर्वत श्रृंखला के नीचे स्थित है, जहां भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन (तिब्बती) प्लेट आपस में टकराती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसी प्लेट टकराव के कारण नेपाल में हर साल छोटे-बड़े सैकड़ों भूकंप आते हैं और बड़े विनाशकारी भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है। राष्ट्रीय भूकंप मापन तथा अनुसन्धान केंद्र के मुताबिक, नेपाल का पूरा क्षेत्र उच्च भूकंपीय जोखिम क्षेत्र में आता है और देश में 92 से अधिक सक्रिय फॉल्ट लाइनें मौजूद हैं।
धरती की सबसे ऊपरी परत को क्रस्ट कहा जाता है, जो कई बड़े टुकड़ों में बंटी होती है। इन टुकड़ों को टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे जाती हैं या फंस जाती हैं, तो उनके बीच अत्यधिक दबाव बनता है। यह दबाव जब अचानक निकलता है, तो ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है और धरती हिलने लगती है, जिसे भूकंप कहा जाता है।
