देहरादून, 07 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक में राज्य में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। मुख्यमंत्री ने भालू, गुलदार, बाघ और हाथी से प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने और वन विभाग व जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग, डिजिटल निगरानी और अर्ली वार्निंग सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रभावित ग्रामों में सोलर फेंसिंग, बायो-फेंसिंग, हनी-बी फेंसिंग, वॉच टावर तथा अन्य सुरक्षा उपाय अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएं और रैपिड रिस्पॉन्स टीम (QRT) को लगातार सक्रिय रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हाथी और बाघ कॉरिडोर सहित सभी वन्यजीव कॉरिडोरों के संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए। वन्यजीव आवागमन मार्गों पर अंडरपास, ओवरपास और एनिमल पास की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे भालू और अन्य वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित नहीं होंगे
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में वन्यजीव समन्वय समिति को सक्रिय रखा जाए और संवेदनशील जिलों, ब्लॉकों व ग्रामों की हॉट-स्पॉट मैपिंग शीघ्र पूरी की जाए। स्कूलों, आंगनबाड़ियों, जलस्रोतों और पैदल मार्गों के आसपास सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने के भी निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इको-टूरिज्म को सुदृढ़ करने के लिए रिजर्व फॉरेस्ट के साथ-साथ वाइल्डलाइफ सेंचुरी और कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्रों में भी कार्य किए जाएं। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन में पशु चिकित्सकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
बैठक में वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े 9 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई, जिनमें केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य की पेयजल योजनाएं, राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र की दो मोटरमार्ग योजनाएं और रामनगर वन प्रभाग से जुड़ा ऑप्टिकल फाइबर प्रस्ताव शामिल है।
इसके अलावा संरक्षित क्षेत्रों की 10 किमी परिधि में उपखनिज चुगान से जुड़े 22 प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के विचारार्थ भेजने का निर्णय लिया गया।
बैठक में जानकारी दी गई कि वन्यजीवों से मानव मृत्यु पर मिलने वाली अनुग्रह राशि 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। 32 वन प्रभागों में त्वरित कार्रवाई के लिए 93 QRT गठित की गई हैं। पिथौरागढ़, चम्पावत और रुद्रप्रयाग में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर की स्थापना के प्रस्ताव भी भेजे गए हैं।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।
बैठक में विधायक दीवान सिंह बिष्ट, सुरेश सिंह चौहान, बंशीधर भगत, प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ सहित राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
