दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच विशेषज्ञों ने परमाणु युद्ध के खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। वैज्ञानिकों और परमाणु युद्ध विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल होता है, तो इसका असर पूरी पृथ्वी पर पड़ेगा और मानव सभ्यता के लिए अभूतपूर्व संकट खड़ा हो सकता है। एक नई वैज्ञानिक स्टडी के मुताबिक दुनिया में मौजूद लगभग 12 हजार परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की स्थिति में करीब 5 अरब लोगों की मौत हो सकती है।
शोध पत्रिका ‘नेचर’ में प्रकाशित एक पीयर-रिव्यूड अध्ययन के अनुसार परमाणु युद्ध के बाद पूरी पृथ्वी ‘न्यूक्लियर विंटर’ यानी परमाणु शीत की चपेट में आ सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बड़े पैमाने पर परमाणु विस्फोट होने से शहरों और जंगलों में भीषण आग लग जाएगी, जिससे भारी मात्रा में धुआं और कालिख वायुमंडल के ऊपरी हिस्से समताप मंडल में पहुंच जाएगी। यह परत सूरज की रोशनी को धरती तक पहुंचने से रोक देगी, जिससे पूरी दुनिया में लंबे समय तक अंधकार और अत्यधिक ठंड का दौर शुरू हो सकता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि कई महाद्वीपीय इलाकों में तापमान माइनस 20 से माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। यह स्थिति कुछ दिनों या महीनों के लिए नहीं बल्कि लगभग 10 साल तक बनी रह सकती है। तापमान में इस भारी गिरावट और धूप की कमी के कारण खेती पूरी तरह से ठप पड़ सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट पैदा हो जाएगा।
‘न्यूक्लियर वॉर: ए सिनेरियो’ की लेखिका और आर्मगेडन विशेषज्ञ एनी जैकबसन ने चेतावनी दी है कि परमाणु विस्फोटों से निकलने वाले आग के गोले 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो सकते हैं। शुरुआती विस्फोटों में करोड़ों लोग तुरंत मारे जाएंगे, लेकिन असली तबाही उसके बाद शुरू होगी जब खेती बर्बाद हो जाएगी और लोग भूख से मरने लगेंगे।
परमाणु विस्फोटों से निकलने वाली गैसें ओजोन परत को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। जब धुआं छंटेगा तो ओजोन परत कमजोर हो चुकी होगी और सूरज की खतरनाक अल्ट्रावायलेट किरणें सीधे पृथ्वी की सतह तक पहुंचेंगी। इससे इंसानों में त्वचा कैंसर, अंधापन और पौधों के डीएनए में गंभीर बदलाव होने का खतरा बढ़ जाएगा।
वैज्ञानिकों के अनुसार परमाणु युद्ध के बाद वैश्विक स्तर पर बारिश में भी भारी कमी आ सकती है। अनुमान है कि वर्षा में 90 प्रतिशत तक गिरावट संभव है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में भयंकर सूखा पड़ सकता है। समुद्र का तापमान गिरने से समुद्री जीवन भी प्रभावित होगा और मछलियों की संख्या तेजी से घट सकती है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह विनाशकारी परमाणु युद्ध की स्थिति में भी दो देश अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकते हैं—ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड। इन देशों की भौगोलिक स्थिति और समुद्री प्रभाव के कारण तापमान में अत्यधिक गिरावट की संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जाती है, जिससे वहां सीमित स्तर पर कृषि जारी रह सकती है।
यह चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव बढ़ रहा है। मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है, वहीं रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध भी जारी है। इसके अलावा चीन और ताइवान के बीच तनाव तथा दक्षिण एशिया में बढ़ती अस्थिरता भी वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल केवल युद्धरत देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरी मानव सभ्यता पर पड़ेगा। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को परमाणु हथियारों के खतरे को कम करने और कूटनीतिक समाधान खोजने की दिशा में गंभीर प्रयास करने की जरूरत है।
