रानीपोखरी/जोलीग्रांट: रानीपोखरी क्षेत्र में प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के निर्माण में हो रही देरी को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। ग्राम प्रधान संगठन के नेतृत्व में ग्रामीणों ने लिस्काबाद गांव स्थित प्रस्तावित भूमि पर बेमियादी धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष अनुप चौहान और लिस्काबाद ग्राम प्रधान अनिल कुमार के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हो रहे हैं। इससे पहले दो फरवरी को संगठन की ओर से एसडीएम ऋषिकेश को ज्ञापन सौंपकर 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग की गई थी। तय समय सीमा समाप्त होने के बावजूद कोई प्रगति न होने पर ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाया।
ग्रामीणों के अनुसार मार्च 2019 में रेशम विभाग की लगभग 10 एकड़ भूमि पर देश की 22वीं नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित करने की घोषणा की गई थी। उस समय के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया था और करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन सात वर्ष बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई है कि अब उक्त भूमि को किसी अन्य उद्देश्य के लिए आवंटित किए जाने की तैयारी की जा रही है, जिससे क्षेत्र में नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की स्थापना से क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी, शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार स्पष्ट समय-सीमा के साथ निर्माण कार्य शुरू करने की घोषणा नहीं करती, तब तक उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।

