नई दिल्ली। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने देश के प्रीपेड मोबाइल उपभोक्ताओं से जुड़ा अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा रिचार्ज व्यवस्था से करोड़ों उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं।
राघव चड्ढा ने कहा कि प्रीपेड रिचार्ज प्लान समाप्त होते ही टेलीकॉम कंपनियां इनकमिंग कॉल्स भी बंद कर देती हैं, जिससे लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर रिचार्ज खत्म होने पर आउटगोइंग कॉल्स बंद की जाती हैं तो यह समझ में आता है, लेकिन इनकमिंग कॉल्स बंद करना उचित नहीं है।
सांसद ने कहा कि इनकमिंग कॉल्स बंद होने से लोगों का जरूरी संपर्क टूट जाता है। कई बार बैंक से आने वाले ओटीपी, सरकारी संदेश और अन्य जरूरी जानकारी भी नहीं मिल पाती। इमरजेंसी की स्थिति में यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है।
राघव चड्ढा ने सरकार से मांग की कि आखिरी रिचार्ज के बाद कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल्स और एसएमएस की सुविधा जारी रहनी चाहिए, ताकि लोगों का जरूरी कम्युनिकेशन बाधित न हो। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि आखिरी रिचार्ज के बाद कम से कम तीन साल तक किसी भी मोबाइल नंबर को डीएक्टिवेट न किया जाए।
उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों से ऐसे सस्ते प्लान शुरू करने की भी अपील की, जिनमें केवल इनकमिंग कॉल्स और जरूरी संदेशों की सुविधा उपलब्ध हो, ताकि जिन उपभोक्ताओं को केवल ओटीपी या जरूरी कॉल्स के लिए नंबर सक्रिय रखना होता है, उन्हें राहत मिल सके।
सांसद ने 28 दिन वाले “मंथली” रिचार्ज प्लान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब किसी प्लान को मासिक कहा जाता है तो उसकी वैलिडिटी 30 या 31 दिन होनी चाहिए। 28 दिन के चक्र के कारण उपभोक्ताओं को एक साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है।
राघव चड्ढा ने कहा कि आज के समय में मोबाइल फोन कोई लग्ज़री नहीं बल्कि एक जरूरी सेवा बन चुका है। भारत में लगभग 125 करोड़ मोबाइल यूज़र्स हैं, जिनमें से करीब 90 प्रतिशत प्रीपेड ग्राहक हैं। ऐसे में टेलीकॉम कंपनियों को अपने प्लान्स में पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों का ध्यान रखना चाहिए।
इस मुद्दे को संसद में उठाए जाने के बाद टेलीकॉम नीतियों और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
