नई दिल्ली:
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर ईरान और अमेरिका के बीच कथित सैन्य टकराव को लेकर कई सनसनीखेज दावे वायरल हो रहे हैं। इन दावों में कहा जा रहा है कि बीते 24 घंटों में ईरान ने अमेरिकी सेना के कई फाइटर जेट, एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर मार गिराए हैं, साथ ही अमेरिकी नेतृत्व का मजाक उड़ाने वाले पोस्ट भी सामने आए हैं। हालांकि, इन दावों की अब तक किसी भी विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय स्रोत से पुष्टि नहीं हो पाई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर वास्तव में इतने बड़े स्तर पर सैन्य नुकसान हुआ होता, तो यह वैश्विक स्तर पर बड़ी खबर बनती और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान इसकी पुष्टि करते। लेकिन अब तक ऐसी कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
इस बीच, अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह के बयान और प्रतिक्रियाएं साझा की जा रही हैं, जिनकी प्रामाणिकता संदिग्ध बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि जिम्बाब्वे स्थित ईरानी दूतावास के नाम से एक कथित पोस्ट वायरल हुआ है, जिसमें अमेरिका पर कटाक्ष किया गया है। हालांकि, इस पोस्ट की सत्यता को लेकर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
रक्षा और रणनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि वर्तमान समय में सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर) भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है जितना कि वास्तविक युद्ध। ऐसे में कई बार भ्रामक या अपुष्ट खबरें तेजी से फैलती हैं, जिनका उद्देश्य जनमत को प्रभावित करना होता है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह की खबरों पर तुरंत भरोसा न करें और केवल विश्वसनीय एवं प्रमाणित स्रोतों से मिली जानकारी पर ही विश्वास करें।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को लेकर फैल रही खबरों में सावधानी बरतना जरूरी है। फिलहाल, बड़े पैमाने पर किसी सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वायरल दावों की सत्यता संदिग्ध है।
