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केंद्र सरकार ने डिजिटल अरेस्ट मामले पर सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की

नई दिल्ली, 13 जनवरी 2026:
केंद्र सरकार ने डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) से जुड़े बढ़ते साइबर फ्रॉड मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। सरकार ने अदालत को बताया है कि इस गंभीर साइबर अपराध को लेकर उठाए जा रहे कदमों पर काम जारी है और जांच को ज़्यादा प्रभावी बनाने के लिए CBI को पूरी जांच सौंप दी गई है। सरकार ने अदालत से एक महीने का समय मांगा है ताकि एक ठोस और प्रभावी व्यवस्था तैयार की जा सके।

सरकार ने कोर्ट में कहा है कि डिजिटल अरेस्ट मामलों की गहन जांच के लिए एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर बनी है।

सरकार ने बताया कि दिल्ली पुलिस की FIR को CBI को सौंपी गई है और CBI ने 9 जनवरी को इस मामले में नई FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों से निपटने के लिए एक ठोस, समन्वित योजना की आवश्यकता है और उसे तैयार करने में समय लगेगा। इसीलिए अदालत से समय मांगा गया है।

सरकार ने बताया है कि इस कमेटी की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) कर रहे हैं। कमेटी में शामिल हैं:

  • MeitY (डिजिटल और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग)
  • DoT (टेलीकॉम विभाग)
  • MEA (विदेश मंत्रालय)
  • वित्तीय सेवा विभाग
  • कानून और न्याय मंत्रालय
  • उपभोक्ता मामले मंत्रालय
  • RBI के वरिष्ठ अधिकारी
  • CBI और NIA के अधिकारी

साइबर अपराध समन्वय केंद्र के सदस्य सचिव आदि।
यह कमेटी अलग-अलग विभागों के साथ मिलकर डिजिटल अरेस्ट के सभी पहलुओं पर काम कर रही है।

‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम का यह फ्रॉड एक साइबर ठगी का तरीका है जिसमें अपराधी खुद को CBI, ED, पुलिस या अन्य अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो या कॉल पर डराते हैं और इसके नाम पर उनसे पैसा ऐंठते हैं। पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वे किसी गंभीर अपराध में फँसे हैं और अगर वे न मानें तो उन पर डिजिटल तरीके से “गिरफ्तारी” लग जाएगी। यह कोई वास्तविक कानूनी “गिरफ्तारी” नहीं है, बल्कि एक धोखाधड़ी का खेल है।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने इस घोर साइबर अपराध की खुद संज्ञान लिया है और कहा है कि यह मामला न्यायपालिका, कानून और प्रणाली पर विश्वास को प्रभावित करता है। अदालत ने गृह मंत्रालय, CBI और अन्य एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे मिलकर इस जाल को तोड़ें और पीड़ितों को सुरक्षा व राहत दें।

सरकार का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम का नेटवर्क बहुत व्यापक और जटिल है, इसलिए इसे सुलझाने के लिए बहुत-से विभागों और एजेंसियों को साथ में काम करना होगा। सरकार के अनुसार एक मजबूत योजना बनाने के लिए थोड़ा समय आवश्यक है ताकि आगे से लोग ऐसे अपराधियों की फँसानों से सुरक्षित रह सकें।

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